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Showing posts with the label Gyan Ganga ज्ञान गंगा

कारगिल विजय दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है

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  कारगिल विजय दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है, जो सन 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों की ऐतिहासिक जीत और वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। वर्ष 2026 में देश इस शौर्य गाथा की 27वीं वर्षगांठ मना रहा है। #कारगिल #कारगिल_विजय_दिवस #KargilVijayDiwas #Bharat #Hindu #भारत #हिन्दू #IndianArmy

हुगली नदी पर भारत की पहली संगठित नौका दौड़ प्रतियोगिता

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  25 जुलाई 1813 को कोलकाता (तब कलकत्ता) में हुगली नदी पर भारत की पहली संगठित नौका दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता की शुरुआत ब्रिटिश अधिकारियों और स्थानीय व्यापारियों के सहयोग से हुई थी। उस समय हुगली नदी व्यापार और परिवहन का मुख्य केंद्र थी, इसलिए इस दौड़ को देखने के लिए नदी के किनारों पर हजारों लोगों की भारी भीड़ जमा हुई थी। इस आयोजन में विभिन्न प्रकार की पारंपरिक और आधुनिक नावों ने हिस्सा लिया था, जिसने भारत में जल क्रीड़ा (Water Sports) और आधुनिक खेल आयोजनों की नींव रखी। यह आयोजन इतना सफल रहा कि इसके बाद कोलकाता और भारत के अन्य हिस्सों में भी नियमित रूप से ऐसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाने लगा। India's First Boat Race  #WaterSports #BoatRace #Boat #Race #NaukaDaud #Nauka #नौका #नौकादौड़ #कलकत्ता #हुगली #Hugli

ऑल इंडिया रेडियो All india Radio

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  भारत में नियमित रेडियो प्रसारण की शुरुआत 23 जुलाई 1927 को बॉम्बे (अब मुंबई) से हुई थी। इस ऐतिहासिक दिन पर देश का पहला निजी रेडियो स्टेशन 'इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी' के तहत शुरू किया गया था। इसके ठीक एक महीने बाद, 26 अगस्त 1927 को कलकत्ता में भी एक रेडियो स्टेशन की शुरुआत की गई। भारतीय इतिहास में इस महत्वपूर्ण बदलाव की याद में हर साल 23 जुलाई को पूरे देश में 'राष्ट्रीय प्रसारण दिवस' के रूप में मनाया जाता है। शुरुआती दौर में यह सेवा निजी हाथों में थी, लेकिन वित्तीय संकट के कारण साल 1930 में ब्रिटिश सरकार ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया और इसका नाम बदलकर 'भारतीय राज्य प्रसारण सेवा' कर दिया। इसके बाद 8 जून 1936 को इस सेवा का नाम बदलकर 'ऑल इंडिया रेडियो' कर दिया गया, जो आज भी दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक प्रसारण संगठनों में से एक है। आजादी के बाद साल 1957 में ऑल इंडिया रेडियो को आधिकारिक तौर पर 'आकाशवाणी' नाम दिया गया, जिसका अर्थ है 'आसमान से आने वाली आवाज'। रेडियो ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम, सूचनाओं के प्रसार, शिक्षा और मनोरंजन में एक...

डॉलर दुनिया की सबसे ताक़तवर मुद्रा क्यों?

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अगर आपसे एक बात पूछी जाए कि क्या आपने कभी सोचा है कि ये जो ‘डॉलर’ है… ये सिर्फ एक काग़ज़ का टुकड़ा क्यों दुनिया की सबसे ताक़तवर मुद्रा बन गया? द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब पूरी दुनिया बर्बाद थी, तब एक देश था जिसके पास 22,000 टन सोना जमा हो चुका था – अमेरिका। यूरोपीय देश अपने युद्ध के लिए हथियार ख़रीदने के लिए अपना सोना बेच चुके थे… किसे? – अमेरिका को। युद्ध के बाद वाशिंगटन में एक बैठक हुई। सवाल उठा – अब दुनिया किस मुद्रा में व्यापार करेगी? ब्रिटेन का पाउंड टूट चुका था, कमज़ोर था। ऐसे में अमेरिका ने प्रस्ताव रखा – “डॉलर में व्यापार करो।” और क्या कहा? – “जो भी देश चाहे, 35 डॉलर देकर 28 ग्राम सोना ले सकता है।” दुनिया मान गई। और यहीं से डॉलर एक सामान्य मुद्रा नहीं, ‘वैश्विक शक्ति’ बन गया। लेकिन 1960 आते-आते सोने के दाम बढ़ने लगे। अब लोग 35 डॉलर में अमेरिका से सोना खरीदते और लंदन में 40 डॉलर में बेच देते। अमेरिका को खतरा महसूस हुआ क्योंकि उसका सोना तेजी से निकल रहा था। समस्या क्या थी? ब्रिटेन को उस समय लोन चाहिए था। लोन देने के बदले में अमेरिका ने लंदन का गोल्ड मार्केट ही बंद करवा दिया। इस...

कौवो को खीर खिलाने का कारण

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क्या_हमारे_ऋषि_मुनि_पागल_थे ? जो_कौवों_के_लिए_खीर_बनाने_को_कहते_थे? और कहते थे कि कौवों को खिलाएंगे तो हमारे पूर्वजों को मिल जाएगा? नहीं, हमारे ऋषि मुनि क्रांतिकारी विचारों के थे। यह है सही कारण। आपने किसी भी दिन पीपल और बरगद के पौधे लगाए हैं? या किसी को लगाते हुए देखा है? क्या पीपल या बड़ के बीज मिलते हैं? इसका जवाब है ना.. नहीं.... बरगद या पीपल की कलम जितनी चाहे उतनी रोपने की कोशिश करो परंतु नहीं लगेगी। कारण प्रकृति/कुदरत ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है। यह दोनों वृक्षों के टेटे कौवे खाते हैं और उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसीग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं। उसके पश्चात कौवे जहां-जहां बीट करते हैं, वहां वहां पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं। पीपल जगत का एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो round-the-clock ऑक्सीजन O2  छोड़ता है और बरगद के औषधि गुण अपरम्पार है। देखो अगर यह दोनों वृक्षों को उगाना है तो बिना कौवे की मदद से संभव नहीं है इसलिए कौवे को बचाना पड़ेगा। और यह होगा कैसे? मादा कौआ भादो महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा ...

आधुनिक युग में वेदों का महत्व

आज के आधुनिक युग में वेदों का महत्व कुछ लोग वेदों के ज्ञान को समझे बिना ही उन्हें आज के समय के लिए व्यर्थ मान लेते हैं। किन्तु सच तो यह है कि वेद भगवान् की वाणी है जिसे स्वयं भगवान् ने सृष्टि के प्रारम्भ में हमारे लाभ के लिए हमें दिया है। वेदों का ज्ञान पूर्ण है और इसे अपौरुषेय भी कहा जाता है अर्थात् जिसकी रचना मनुष्यों ने नहीं की है। इनका उद्देश्य हमें इस भौतिक जगत् के दु:खों से छुटकारा दिलाकर शाश्वत् जगत् का परम सुख प्रदान करना है। आज के युग में विज्ञान ने बहुत अधिक प्रगति की है किन्तु क्या लोगों की सभी समस्याएँ समाप्त हो गई हैं। यदि ध्यान से देखा जाए तो शारीरिक समस्याओ जैसे कि बीमारियों की संख्या में वृद्धि ही हुई है। और मानसिक समस्याओ का तो कहना ही क्या ? मानसिक समस्याएँ आने वाले समय के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं और विज्ञान के पास इनसे लड़ने के लिए कोई उपाय नहीं है। इन शारीरिक एवं मानसिक समस्याओ से छुटकारा पाने के लिए पूरे विश्व में लोग योग, आयुर्वेद, मंत्र ध्यान, शाकाहार और अनेक भारतीय संस्कृति से जुड़ी हुई तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। यह कहना कि आधुनिक प्रगति के इस युग ...

मुझे रोज सत्संग की क्या जरूरत है

मुझे रोज सत्संग की क्या जरूरत है..         एक बार एक युवक संत के पास आया और कहने लगा , ‘'गुरू महाराज ! मैंने अपनी शिक्षा से पर्याप्त ज्ञान ग्रहण कर लिया है । मैं विवेकशील हूं और अपना अच्छा-बुरा भली-भांति समझता हूं , किंतु फिर भी मेरे माता-पिता मुझे निरंतर सत्संग की सलाह देते रहते हैं । जब मैं इतना ज्ञानवान और विवेकयुक्त हूं, तो मुझे रोज सत्संग की क्या जरूरत है ?'’          संत ने उसके प्रश्न का मौखिक उत्तर न देते हुए एक हथौड़ी उठाई और पास ही जमीन पर गड़े एक खूंटे पर मार दी । युवक अनमने भाव से चला गया ।         अगले दिन वह फिर संत के पास आया और बोला, " मैंने आपसे कल एक प्रश्न पूछा था, किंतु अापने उत्तर नहीं दिया । क्या आज आप उत्तर देंगे ?" संत ने पुन: खूंटे के ऊपर हथौड़ी मार दी। किंतु बोले कुछ नहीं । युवक ने सोचा कि संत हैं, शायद आज भी मौन में हैं ।        वह तीसरे दिन फिर आया और अपना प्रश्न दोहराया । संत ने फिर से खूंटे पर हथौड़ी चलाई । अब युवक परेशान होकर बोला, ‘'आखिर आप मेरी बात का जवाब क्यों नह...

संसार में सुखी कौन है

एक बार एक राजा विदेश को गया। जब उसने वापस देश लौटने का विचार बनाया तो घर में अपनी चारों रानियों को अलग-अलग पत्र लिखकर पूछा कि विदेश से उनकी आवश्यकता की कौन सी वस्तु उनके लिए लाई जाय? उनमें से तीन रानियों ने अपने पसंद की वस्तु लिखकर वापस राजा के पास पत्र भिजवा दिये, किन्तु जो सबसे छोटी रानी थी, उसने सिर्फ 1 लिखकर पत्र वापस भिजवा दिया। राजा ने चारों चिट्ठियों को पढ़ा । किसी रानी ने वस्त्र लिखे थे, किसी ने आभूषण लिखे थे, किसी ने खाने पीने की वस्तु लिखी थीं। राजा विदेश से वापस आया और जिस रानी ने जो वस्तु लिखी थी, वह उसके पास पहुंचा दी। सबसे छोटी रानी ने 1 लिखकर पत्र भेजा था, राजा इसका आशय नहीं समझ पाया। वह छोटी रानी के महल में गया और पूछा -- प्रिये! आपने 1 लिखकर हमें विस्मय में डाल दिया। आप इसका आशय स्पष्ट करें । रानी ने कहा-- महाराज ! मुझे तो किसी सांसारिक वस्तु की आवश्यकता नहीं थी, मुझे तो एक आप ही चाहिए थे, वो मिल गये हैं । राजा रानी के अतिशय प्रेम को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। छोटी रानी ने माया को नहीं चाहा, बल्कि मायापति को चाहा तो उसे राजा मिल गये ।          ऐस...