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बर्लिन की दीवार का इतिहास

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### बर्लिन की दीवार का इतिहास: क्यों बनी और क्यों गिराई गई? द्वितीय विश्व युद्ध में 1945 में जर्मनी की हार के बाद उसे चार हिस्सों में बाँट दिया गया। इन पर अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और सोवियत संघ का नियंत्रण था। बाद में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के कब्जे वाले क्षेत्र मिलकर पश्चिमी जर्मनी (FRG) बने, जबकि सोवियत संघ के नियंत्रण वाला क्षेत्र पूर्वी जर्मनी (GDR) बना। पश्चिमी जर्मनी में लोकतांत्रिक शासन और पूँजीवादी अर्थव्यवस्था थी, जबकि पूर्वी जर्मनी में कम्युनिस्ट पार्टी का शासन था। दोनों व्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और राजनीतिक अंतर के कारण पूर्वी जर्मनी के लाखों नागरिक पश्चिमी जर्मनी जाने लगे। 1949 से अगस्त 1961 के बीच लगभग 25 से 30 लाख लोग पूर्वी जर्मनी छोड़कर जा चुके थे। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और अन्य कुशल पेशेवर भी शामिल थे। इससे पूर्वी जर्मनी की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा था और उसकी सरकार की चिंता बढ़ रही थी। इसी पलायन को रोकने के लिए 13 अगस्त 1961 को पूर्वी जर्मनी की सरकार ने बर्लिन की सीमा बंद कर दी। शुरुआत में कांटेदार तार लगाए गए और सड़कों तथा रेलमार्गों को बंद किया गया। ब...

प्रधानमंत्री मोदी जी के हाथ में ये वॉच देखिए। पहली नज़र में लगेगा कि शायद ये कोई लग्ज़री रोलेक्स या ओमेगा होगी, लेकिन इसकी असली कहानी किसी महंगे स्विस ब्रांड से कहीं ज्यादा दिलचस्प है। इस वॉच के डायल पर लगा है

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  प्रधानमंत्री मोदी जी के हाथ में ये वॉच देखिए। पहली नज़र में लगेगा कि शायद ये कोई लग्ज़री रोलेक्स या ओमेगा होगी, लेकिन इसकी असली कहानी किसी महंगे स्विस ब्रांड से कहीं ज्यादा दिलचस्प है। इस वॉच के डायल पर लगा है 1947 का एक रेयर वन रुपी कॉइन, जिस पर वॉकिंग टाइगर बना हुआ है। आज़ादी के दौर के इस सिक्के को नए भारत के प्रतीक से जोड़कर देखा जाता है। इस कहानी की शुरुआत होती है जयपुर के गौरव मेहता से, जिन्हें बचपन से पुराने सिक्के और स्टैम्प्स कलेक्ट करने का शौक था। एक दिन उन्होंने एक साधारण क्वार्ट्ज वॉच को खोलकर उसका डायल निकाल दिया और अपने कलेक्शन से एक विंटेज ब्रिटिश इंडियन कॉइन को उसके अंदर फिट कर दिया। वॉच तैयार हुई तो उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि ये छोटा सा प्रयोग उनकी पूरी ज़िंदगी बदलने वाला है। जहां भी गौरव ये वॉच पहनकर जाते, लोग उनसे उसी के बारे में पूछने लगते। किसी ने नहीं पूछा कि ये रोलेक्स है या ओमेगा। लोगों की दिलचस्पी इस बात में थी कि आखिर इस घड़ी के डायल पर लगा ये पुराना सिक्का क्या कहानी कहता है। यही वो पल था, जब गौरव को समझ आया कि लोगों को सिर्फ घड़ी नहीं, बल्कि उसके पीछे ...

सुकेश चंद्रशेखर। इंडिया का नंबर वन ठग

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  इल्ज़ाम है कि इस आदमी ने बैंकों से नहीं, सीधे लोगों से 200 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा की ठगी की। नाम है सुकेश चंद्रशेखर। इंडिया का नंबर वन ठग बनने की इसकी कहानी भी कमाल की है। किसी को भी ठगना हो तो इसका सिंपल फॉर्मूला था पहले सामने वाले की ज़िंदगी की सबसे बड़ी परेशानी ढूँढो और फिर तीन सुनहरे शब्द बोल दो: “अभी ठीक करके देता हूँ।” 🤣 कहानी शुरू होती है एक साड़ी की दुकान से। महाशय एक साड़ी ब्रांड वाले के पास पहुँचे और बोले, “भाईसाब, आपकी दुकान के अंदर मैं कैटरीना कैफ को ले आऊँगा।” बस, इतनी सी बात और भाईसाब ने 20 लाख रुपये निकाल लिए। मज़े की बात ये कि उस वक्त ये भाई सिर्फ़ 17 साल का था। हालांकि कैटरीना कैफ तो छोड़िए, मोहम्मद कैफ भी दुकान पर नहीं आया। फिर भाई को पता चला कि उसके किसी दूर के रिश्तेदार की जमीन बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी के पास फँसी हुई है। भाई रिश्तेदार के पास पहुँचा और फिर वही पुराना डायलॉग “अभी ठीक करके देता हूँ।” सामने वाले ने एक करोड़ रुपये दे दिए और भाईसाब फिर गायब। 😁 लेकिन असली खेल 2016 में शुरू हुआ, जब सुकेश ब्रो ने जंगल में रहकर शेर के मुँह में हाथ डाल दिया। जयलल...

1 सितंबर 1798 को हैदराबाद के निजाम अली खान और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई सहायक संधि भारतीय इतिहास का एक बड़ा मोड़ थी, जिसने भारत की स्वतंत्रता को गहरे जख्म दिए

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  1 सितंबर 1798 को हैदराबाद के निजाम अली खान और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई सहायक संधि भारतीय इतिहास का एक बड़ा मोड़ थी, जिसने भारत की स्वतंत्रता को गहरे जख्म दिए। गवर्नर-जनरल लॉर्ड वेलेज़ली की इस कूटनीतिक चाल को स्वीकार करने वाली हैदराबाद पहली रियासत बनी। मराठों और टीपू सुल्तान के डर से निजाम ने अपने राज्य में ब्रिटिश सेना रखना स्वीकार तो कर लिया, लेकिन बदले में अपनी संप्रभुता पूरी तरह खो दी। इस संधि के कारण निजाम को अपने दरबार से फ्रांसीसियों को निकालना पड़ा और अपनी विदेश नीति अंग्रेजों के हाथों में सौंपनी पड़ी। इस व्यवस्था ने हैदराबाद को अंदर से खोखला कर दिया क्योंकि सेना का भारी-भरकम खर्च उठाने के लिए जनता पर करों का बोझ लाद दिया गया, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो गई और शासक केवल अंग्रेजों की कठपुतली बनकर रह गए। पूरे भारत के संदर्भ में इस संधि के बेहद विनाशकारी और गलत परिणाम सामने आए। इसने एक-एक कर भारतीय रियासतों की स्वतंत्रता को पूरी तरह लील लिया। इस नीति के कारण भारतीय शासक अपनी ही सेना से हाथ धो बैठे और पूरी तरह ब्रिटिश सुरक्षा पर निर्भर हो गए, जिसने...

1 सितंबर 1942 को प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रासबिहारी बोस ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय राष्ट्रीय सेना यानी आईएनए (INA) की स्थापना की आधिकारिक घोषणा की थी

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  1 सितंबर 1942 को प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रासबिहारी बोस ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय राष्ट्रीय सेना यानी आईएनए (INA) की स्थापना की आधिकारिक घोषणा की थी। इस सेना के गठन में कैप्टन मोहन सिंह की मुख्य भूमिका थी, जिन्हें इसका पहला सेनापति बनाया गया था। इस फौज में ज्यादातर वे भारतीय सैनिक शामिल थे, जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने युद्ध बंदी बना लिया था। इस सेना का मुख्य उद्देश्य जापानी सेना के सहयोग से भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आज़ाद कराना था। हालांकि जापानी अधिकारियों के साथ मतभेदों के कारण दिसंबर 1942 में यह पहली सेना भंग हो गई थी। इसके बाद जुलाई 1943 में रासबिहारी बोस ने इस आंदोलन की कमान नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सौंप दी, जिन्होंने इसका पुनर्गठन करके इसे 'आजाद हिंद फौज' के रूप में एक नई और ऐतिहासिक पहचान दी। -- लोकेश कुशवाहा  #भारत #रासबिहारीबॉस #इतिहास #RasBihariBose #Fact #History #factsinhindi #factsdaily #historyfacts #historyofindia #historymatters #Freedom

स्वतंत्र भारत में 1 सितंबर 1947 को आधिकारिक 'भारतीय मानक समय' (IST) को पूरे देश के लिए लागू किया गया

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  स्वतंत्र भारत में 1 सितंबर 1947 को आधिकारिक 'भारतीय मानक समय' (IST) को पूरे देश के लिए लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश को एक समय के सूत्र में बांधना और प्रशासन, परिवहन व संचार व्यवस्था में एकरूपता लाना था। भारतीय मानक समय, ग्रीनविच मीन टाइम (GMT/UTC) से 5 घंटे 30 मिनट आगे यानी UTC+05:30 है। भारत का यह समय 82.5 डिग्री पूर्वी देशांतर रेखा (82° 30' E) के आधार पर मापा जाता है, जो उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के पास मिर्जापुर और नैनी से होकर गुजरती है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ब्रिटिश काल के दौरान 1 जनवरी 1906 को ही IST को एक मानक के रूप में अपनाया गया था, लेकिन आजादी के बाद 1 सितंबर 1947 को इसे आधिकारिक रूप से पूरे देश के लिए एकमात्र राष्ट्रीय समय घोषित किया गया। इसके बावजूद कोलकाता ने 1948 तक और मुंबई ने 1955 तक अपना अलग स्थानीय समय बनाए रखा था, जिसके बाद वे भी पूरी तरह IST से जुड़ गए। वर्तमान में भारत के इस आधिकारिक समय का सटीक रखरखाव और संरक्षण नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) द्वारा किया जाता है। -- लोकेश कुशवाहा  #भारत #समय ...

1 सितंबर 1939 को पोलैंड पर जर्मन आक्रमण द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत करने वाली सबसे निर्णायक घटना

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  1 सितंबर 1939 को पोलैंड पर जर्मन आक्रमण द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत करने वाली सबसे निर्णायक घटना थी, जिसे सैन्य इतिहास में 'केस व्हाइट' के नाम से भी जाना जाता है। इस हमले के दौरान जर्मन सेना ने पहली बार अपनी कुख्यात 'ब्लिट्जक्रेग' यानी बिजली जैसी तेज गति से आक्रमण करने की रणनीति का इस्तेमाल किया, जिसने पोलिश रक्षा पंक्ति को झकझोर कर रख दिया। इस आक्रमण के पीछे जर्मनी और सोवियत संघ के बीच हुआ एक गुप्त समझौता था, जिसे मोलोटोव-रिबेंट्रोप पैक्ट कहा जाता है। इसी समझौते के तहत आगे चलकर 17 सितंबर 1939 को सोवियत संघ ने भी पूर्व की तरफ से पोलैंड पर हमला कर दिया और दोनों महाशक्तियों ने पूरे देश को आपस में बांट लिया। ब्रिटेन और फ्रांस ने पोलैंड की संप्रभुता की रक्षा के लिए एक सैन्य संधि की थी, जिसके कारण अपने वादे का पालन करते हुए उन्होंने 3 सितंबर को जर्मनी के खिलाफ युद्ध की आधिकारिक घोषणा कर दी और इस तरह पूरा यूरोप एक भीषण वैश्विक संघर्ष की आग में झुलस गया। #इतिहास #पोलैंड #polland #WorldWar2 #worldwar2history #WorldWar #History #Fact