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भारत में मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज के निजीकरण की शुरुआत कांग्रेस ने की थी

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  आज राहुल गांधी ने इंजीनियरिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज के निजी होने पर सवाल उठा रहा है और मोदी सरकार को कोस रहा है। सोचिए यह कितना बड़ा दोगलापन है। भारत में मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज के निजीकरण की शुरुआत कांग्रेस ने की थी राजनीतिक बयानबाज़ी के मंच से जब राहुल गांधी निजी मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों के नाम पर मोदी सरकार को घेरने निकलते हैं, तो यह सीधा-सीधा दोहरे रवैये का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आता है। जिस निजीकरण और डोनेशन कल्चर को आज वह देश के लिए अभिशाप बता रहे हैं, उसकी असली नींव किसी और ने नहीं बल्कि खुद कांग्रेस पार्टी ने ही अपने शासनकाल में रखी थी। इतिहास के पन्ने इस बात के पक्के गवाह हैं कि भारत में व्यावसायिक शिक्षा का बाज़ारीकरण कांग्रेस के दौर में ही फला-फूला। उडुपी में मणिपाल से लेकर कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र तक निजी कॉलेजों की जो फसल उगाई गई, उसके पीछे कांग्रेस नेताओं का ही सीधा संरक्षण और दबदबा था। 1980 के दशक में भारत में निजी इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों (Capitation fee colleges) की शुरुआत सबसे पहले कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से हुई। उस समय...

अमेरिका ने जापान के नागासाकी शहर पर "फैट मैन" नामक परमाणु बम्ब गिराया

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  9 अगस्त 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान के नागासाकी शहर पर "फैट मैन" कोडनेम वाला एक अत्यंत विनाशकारी प्लूटोनियम परमाणु बम गिराया। अमेरिकी वायुसेना के बी-29 बमवर्षक विमान "बॉकस्कर" द्वारा सुबह ठीक 11:02 बजे यह हमला किया गया था। यह इतिहास का दूसरा और अब तक का अंतिम परमाणु हमला था, जो हिरोशिमा पर 6 अगस्त को गिराए गए पहले यूरेनियम बम के ठीक तीन दिन बाद हुआ। इस भीषण विस्फोट के प्रभाव से नागासाकी शहर का एक बड़ा हिस्सा पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील हो गया और अत्यधिक गर्मी तथा सदमे की लहरों के कारण लगभग 39,000 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। नागासाकी पर हमले के बाद तबाही का सिलसिला थमा नहीं, क्योंकि परमाणु विस्फोट से निकले बेहद खतरनाक विकिरण के संपर्क में आने के कारण आने वाले हफ्तों और महीनों में हजारों लोग गंभीर बीमारियों का शिकार होते रहे। साल 1945 के अंत तक इस हमले में मरने वालों और बुरी तरह प्रभावित होने वालों की कुल संख्या बढ़कर 74,000 से भी अधिक हो गई। इस अभूतपूर्व तबाही और भारी जनहानि के दबाव में आकर अंततः जापान के सम्र...

9 अगस्त 1831 को अमेरिका में पहली बार व्यावसायिक रूप से स्टीम इंजन यानी भाप से चलने वाली यात्री ट्रेन का सफल संचालन किया

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  9 अगस्त 1831 को अमेरिका में पहली बार व्यावसायिक रूप से स्टीम इंजन यानी भाप से चलने वाली यात्री ट्रेन का सफल संचालन किया गया था। इस ऐतिहासिक ट्रेन के इंजन का नाम डीविट क्लिंटन रखा गया था, जो न्यूयॉर्क के पूर्व गवर्नर के नाम पर आधारित था। अपनी पहली यात्रा के दौरान इस ट्रेन ने न्यूयॉर्क के अल्बानी से शेंगेक्टैडी के बीच लगभग 26 किलोमीटर की दूरी तय की थी। उस समय ट्रेन के डिब्बे आधुनिक रूप में नहीं थे, बल्कि घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले पारंपरिक स्टेजकोच यानी बग्घियों को पटरियों के अनुकूल बनाकर इंजन के पीछे जोड़ा गया था। यह इंजन ईंधन के रूप में लकड़ी या कोयले का इस्तेमाल करता था और इसकी रफ्तार लगभग 19 से 48 किलोमीटर प्रति घंटा थी। इस घटना ने अमेरिका में कमर्शियल रेलवे युग की शुरुआत की और भविष्य में परिवहन के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया। #इतिहास #फैक्ट #इंजन #America #History #Fact #Engine

काकोरी कांड 9 अगस्त 1925

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  9 अगस्त 1925 को हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, चंद्रशेखर आजाद, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह सहित दस प्रमुख क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जंग छेड़ने के लिए काकोरी में एक बड़ी रणनीतिक कार्रवाई को अंजाम दिया था। क्रांतिकारी अपनी सशस्त्र क्रांति के लिए हथियार खरीदने और संगठन को मजबूत करने के लिए धन जुटाना चाहते थे, जिसके चलते उन्होंने शाहजहाँपुर से लखनऊ जा रही 8-डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन को काकोरी नामक रेलवे स्टेशन के पास चेन खींचकर जबरन रोक लिया। इसके बाद उन्होंने ट्रेन के गार्ड के डिब्बे में रखे ब्रिटिश सरकार के शाही खजाने की तिजोरी को सफलतापूर्वक लूट लिया, जिसमें कुल 4600 रुपये से अधिक की राशि शामिल थी। इस साहसिक कार्रवाई के दौरान दुर्घटनावश एक यात्री अहमद अली की गोली लगने से मौत हो गई थी, जिसके बाद ब्रिटिश प्रशासन में हड़कंप मच गया और इस पूरी घटना को इतिहास में 'काकोरी कांड' या वर्तमान आधिकारिक नाम 'काकोरी ट्रेन एक्शन' के रूप में दर्ज किया गया। इस घटना के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने देशव्यापी दमन चक्र ...

Hiroshima Day 6 August

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  हिरोशिमा दिवस हर वर्ष 6 अगस्त को पूरी दुनिया में परमाणु युद्ध के भयानक दुष्परिणामों को याद करने और विश्व शांति का संदेश देने के लिए मनाया जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 6 अगस्त 1945 को सुबह ठीक 8:15 बजे अमेरिका ने जापान के औद्योगिक शहर हिरोशिमा पर 'लिटिल बॉय' नाम का पहला परमाणु बम गिराया था। इस विनाशकारी हमले को अंजाम देने वाले अमेरिकी बी-29 बमवर्षक विमान का नाम 'एनोला गे' था। इस धमाके ने पल भर में पूरे शहर को मलबे के ढेर में बदल दिया और हजारों मासूम जिंदगियां तुरंत खत्म हो गईं। इस ऐतिहासिक घटना का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के देशों को परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता के प्रति जागरूक करना है ताकि भविष्य में कभी भी ऐसी मानवीय त्रासदी दोबारा न हो। यह दिन उन सभी पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि देने का अवसर है जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई या इसके रेडियोधर्मी विकिरण की वजह से पीढ़ियों तक गंभीर बीमारियों का सामना किया। आज के समय में हिरोशिमा दिवस का सबसे बड़ा संदेश वैश्विक शांति, अहिंसा और परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को मजबूत करना है ताकि आने वाली पीढ़ियों ...

भारत पाकिस्तान युद्ध 1965

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  5 अगस्त 1965 को पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' के तहत बड़े पैमाने पर घुसपैठियों को भारतीय सीमा के भीतर भेजना शुरू कर दिया था। इसके ठीक अगले दिन यानी 6 अगस्त 1965 तक सीमा पर दोनों देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष बहुत तेजी से बढ़ गया। पाकिस्तानी सेना की योजना स्थानीय कश्मीरियों के वेश में अपने सैनिकों को भेजकर घाटी में विद्रोह भड़काने की थी, लेकिन स्थानीय चरवाहों और नागरिकों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत इसकी सूचना भारतीय सेना को दे दी। सूचना मिलते ही भारतीय सेना ने त्वरित कार्रवाई शुरू की, जिससे सीमावर्ती इलाकों में भीषण झड़पें शुरू हो गईं। यह सीमाई संघर्ष लगातार गंभीर होता गया और अगस्त के अंत तक भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हाजी पीर दर्रे पर नियंत्रण कर लिया। संघर्ष की यही तीव्रता अंततः सितंबर 1965 की शुरुआत में एक पूर्ण और बड़े पैमाने के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बदल गई, जिसमें दोनों देशों की वायुसेना और बख्तरबंद टैंकों ने भी हिस्सा लिया। #भारत #1965War #History #IndVsPakWar ##TodayHistory #History #Fact

जब अमेरिकी वायुसेना के बी-29 बमवर्षक विमान 'एनोला गे' ने जापान के औद्योगिक शहर हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया।

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  6 अगस्त 1945 की सुबह 8:15 बजे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इतिहास की सबसे विनाशकारी घटना घटी, जब अमेरिकी वायुसेना के बी-29 बमवर्षक विमान 'एनोला गे' ने जापान के औद्योगिक शहर हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया। कर्नल पॉल टिबेट्स द्वारा उड़ाए गए इस विमान से छोड़े गए यूरेनियम आधारित बम को 'लिटिल बॉय' कोडनेम दिया गया था। इस भीषण विस्फोट के कारण पल भर में पूरा शहर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया और अत्यधिक तापमान तथा तीव्र शॉकवेव्स की वजह से लगभग 70,000 से 80,000 लोग तुरंत मारे गए। यह तबाही यहीं नहीं रुकी क्योंकि परमाणु विकिरण की वजह से साल के अंत तक मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर करीब 140,000 तक पहुंच गई, और आने वाली पीढ़ियां भी इसके भयानक जैविक प्रभावों को झेलने के लिए मजबूर हुईं। इस महाविनाश के ठीक तीन दिन बाद, यानी 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के दूसरे प्रमुख शहर नागासाकी पर 'फैट मैन' नामक एक और प्लूटोनियम आधारित परमाणु बम गिराया। इन दोनों परमाणु हमलों की भयावहता और अभूतपूर्व क्षति को देखते हुए आखिरकार 15 अगस्त 1945 को जापान के सम्राट हिरोहितो ने बिना...