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Hiroshima Day 6 August

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  हिरोशिमा दिवस हर वर्ष 6 अगस्त को पूरी दुनिया में परमाणु युद्ध के भयानक दुष्परिणामों को याद करने और विश्व शांति का संदेश देने के लिए मनाया जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 6 अगस्त 1945 को सुबह ठीक 8:15 बजे अमेरिका ने जापान के औद्योगिक शहर हिरोशिमा पर 'लिटिल बॉय' नाम का पहला परमाणु बम गिराया था। इस विनाशकारी हमले को अंजाम देने वाले अमेरिकी बी-29 बमवर्षक विमान का नाम 'एनोला गे' था। इस धमाके ने पल भर में पूरे शहर को मलबे के ढेर में बदल दिया और हजारों मासूम जिंदगियां तुरंत खत्म हो गईं। इस ऐतिहासिक घटना का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के देशों को परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता के प्रति जागरूक करना है ताकि भविष्य में कभी भी ऐसी मानवीय त्रासदी दोबारा न हो। यह दिन उन सभी पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि देने का अवसर है जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई या इसके रेडियोधर्मी विकिरण की वजह से पीढ़ियों तक गंभीर बीमारियों का सामना किया। आज के समय में हिरोशिमा दिवस का सबसे बड़ा संदेश वैश्विक शांति, अहिंसा और परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को मजबूत करना है ताकि आने वाली पीढ़ियों ...

भारत पाकिस्तान युद्ध 1965

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  5 अगस्त 1965 को पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' के तहत बड़े पैमाने पर घुसपैठियों को भारतीय सीमा के भीतर भेजना शुरू कर दिया था। इसके ठीक अगले दिन यानी 6 अगस्त 1965 तक सीमा पर दोनों देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष बहुत तेजी से बढ़ गया। पाकिस्तानी सेना की योजना स्थानीय कश्मीरियों के वेश में अपने सैनिकों को भेजकर घाटी में विद्रोह भड़काने की थी, लेकिन स्थानीय चरवाहों और नागरिकों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत इसकी सूचना भारतीय सेना को दे दी। सूचना मिलते ही भारतीय सेना ने त्वरित कार्रवाई शुरू की, जिससे सीमावर्ती इलाकों में भीषण झड़पें शुरू हो गईं। यह सीमाई संघर्ष लगातार गंभीर होता गया और अगस्त के अंत तक भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हाजी पीर दर्रे पर नियंत्रण कर लिया। संघर्ष की यही तीव्रता अंततः सितंबर 1965 की शुरुआत में एक पूर्ण और बड़े पैमाने के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बदल गई, जिसमें दोनों देशों की वायुसेना और बख्तरबंद टैंकों ने भी हिस्सा लिया। #भारत #1965War #History #IndVsPakWar ##TodayHistory #History #Fact

जब अमेरिकी वायुसेना के बी-29 बमवर्षक विमान 'एनोला गे' ने जापान के औद्योगिक शहर हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया।

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  6 अगस्त 1945 की सुबह 8:15 बजे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इतिहास की सबसे विनाशकारी घटना घटी, जब अमेरिकी वायुसेना के बी-29 बमवर्षक विमान 'एनोला गे' ने जापान के औद्योगिक शहर हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया। कर्नल पॉल टिबेट्स द्वारा उड़ाए गए इस विमान से छोड़े गए यूरेनियम आधारित बम को 'लिटिल बॉय' कोडनेम दिया गया था। इस भीषण विस्फोट के कारण पल भर में पूरा शहर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया और अत्यधिक तापमान तथा तीव्र शॉकवेव्स की वजह से लगभग 70,000 से 80,000 लोग तुरंत मारे गए। यह तबाही यहीं नहीं रुकी क्योंकि परमाणु विकिरण की वजह से साल के अंत तक मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर करीब 140,000 तक पहुंच गई, और आने वाली पीढ़ियां भी इसके भयानक जैविक प्रभावों को झेलने के लिए मजबूर हुईं। इस महाविनाश के ठीक तीन दिन बाद, यानी 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के दूसरे प्रमुख शहर नागासाकी पर 'फैट मैन' नामक एक और प्लूटोनियम आधारित परमाणु बम गिराया। इन दोनों परमाणु हमलों की भयावहता और अभूतपूर्व क्षति को देखते हुए आखिरकार 15 अगस्त 1945 को जापान के सम्राट हिरोहितो ने बिना...

किशोर कुमार ने संजय गांधी के फरमाइश पर जब गाना नहीं गया

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  4 अगस्त 1929 को मशहूर गायक और कलाकार किशोर कुमार का जन्म हुआ था, उनका जन्म खंडवा, मध्यप्रदेश में हुआ था। 4 अगस्त 1929 को जन्मे देश के चहेते और अज़ीम गायक किशोर कुमार के जन्मदिन के इस अवसर पर कांग्रेस और संजय गांधी के उसी काले कारनामे और तानाशाही का एक खौफनाक किस्सा उजागर होता है। जो आज मैं आपको बताता हूं। 1976 के उस दौर को याद कीजिए जब भारत में आपातकाल का काला साया छाया हुआ था। संविधान को ताक पर रखकर देश को एक तानाशाही सोच के हवाले कर दिया गया था। उसी समय कांग्रेस पार्टी और युवा कांग्रेस के मुख्य मार्गदर्शक बने संजय गांधी के अहंकार की कोई सीमा नहीं थी। सत्ता के मद में चूर सरकार ने अपनी नीतियों और काम का ढोल पीटने के लिए दिल्ली में 'गीतों भरी शाम' नाम से एक बड़े संगीतमय कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की। इस सरकारी तमाशे में बॉलीवुड के तमाम मशहूर कलाकारों और गायकों को हुक्म बजाने और हाजिरी लगाने का कड़ा फरमान जारी किया गया था। इसी सिलसिले में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव सी.बी. जैन ने किशोर कुमार से संपर्क साधा और उन्हें इस शो में अपनी आवाज देने के लिए दिल्ली आने का फर...

केवल नरेंद्र मोदी का विरोध

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  राजनीति का काज ही कुछ ऐसा अनोखा है कि यहाँ छात्र तभी छात्र माना जाता है जब वह केंद्र सरकार के दरवाजे पर ताली या थाली बजा रहा हो। जैसे ही वही छात्र पंजाब, झारखंड, तेलंगाना या केरल जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों की सड़कों पर उतरता है, उसकी हैसियत रहस्यमयी ढंग से गायब हो जाती है। झारखंड में युवा सड़कों पर धूल फांकते हुए विरोध कर रहे हैं, पर मानवाधिकारों और छात्रों के हितों पर दिन-रात सोशल मीडिया के लाउडस्पीकर बजाने वाले 'बुद्धिजीवी' अचानक भूमिगत हो चुके हैं। दूर-दूर तक देखने पर भी उनका कोई अता-पता नहीं मिलता, जैसे वे किसी दूसरी दुनिया के प्राणी हों जिनका कैमरे की लाइट पड़े बिना बाहर निकलना वर्जित है। पंजाब में नौजवान अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन क्या किसी ने वहां डिंपल यादव या अरविंद केजरीवाल को सांत्वना के दो शब्द बोलते देखा? झारखंड में छात्र विरोध कर रहे हैं किसी ने कॉकरोचों को देखा क्या? तेलंगाना में जब युवा अपना भविष्य बचाने के लिए धरने पर बैठते हैं, तो संवेदनाओं का झरना बहाने वाली प्रियंका वाड्रा के आंसू पूरी तरह सूख जाते हैं। वहीं केरल की सड़कों पर छात्र अधिकारों का...

मोदी के reels वीडियो

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  राजनीतिक मंच हो या डिजिटल दुनिया, जब-जब यह माना जाता है कि खेल के नियम तय हो चुके हैं, तब-तब कोई आकर पूरी बाजी ही पलट देता है। जो लोग कल तक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को सिर्फ एक कुशल नेतृत्वकर्ता, कठोर शासक और रणनीतिकार मानकर अपनी फाइलें तैयार कर रहे थे, आज वे अपने चश्मे का नंबर बदलने पर मजबूर हैं। अब समझ आ रहा है कि देश के प्रधानसेवक सिर्फ सत्ता के गलियारों में ही हुकूमत नहीं चलाते, बल्कि जब डिजिटल मंच पर उतरते हैं, तो बड़े से बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर, ट्रॉलर और रोस्टर भी अपनी स्क्रिप्ट भूल जाते हैं। मात्र कुछ ही दिनों के अपने इस नए डिजिटल अवतार से उन्होंने देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के कंटेंट क्रिएटर्स की नींद उड़ा दी है। जिस काम को करने के लिए आजकल की पूरी युवा पीढ़ी दिन-रात हैशटैग, ट्रेंड और बैकग्राउंड म्यूज़िक के फेर में पड़ी रहती है, उसे हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने चुटकी बजाते ही मिनटों में एक नया कीर्तिमान बना दिया। मात्र एक हफ्ते के भीतर इंस्टाग्राम पर पचास लाख नए फॉलोअर्स जोड़ लेना और एक अरब यानी पूरे एक हजार मिलियन रील व्यूज का पहाड़ खड़ा कर देना कोई म...

3 अगस्त 1958 को अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी यूएसएस नॉटिलस ने आर्कटिक महासागर में बर्फ की मोटी चादर के नीचे से गुजरते हुए भौगोलिक उत्तरी ध्रुव तक पहुँचकर इतिहास रच दिया था।

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  3 अगस्त 1958 को अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी यूएसएस नॉटिलस ने आर्कटिक महासागर में बर्फ की मोटी चादर के नीचे से गुजरते हुए भौगोलिक उत्तरी ध्रुव तक पहुँचकर इतिहास रच दिया था। यह दुनिया का पहला ऐसा पोत था जिसने पानी के भीतर रहते हुए उत्तरी ध्रुव का यह सफर सफलतापूर्वक पूरा किया। "ऑपरेशन सनशाइन" नाम के इस ऐतिहासिक मिशन का नेतृत्व कमांडर विलियम आर. एंडरसन ने किया था। इस अभियान के दौरान पनडुब्बी ने अलास्का के प्वाइंट बैरो से गोता लगाया और बर्फ के नीचे करीब 1,830 मील यानी लगभग 2,945 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय की। आखिरकार 3 अगस्त 1958 को पूर्वी समयानुसार रात 11:15 बजे यह पनडुब्बी उत्तरी ध्रुव के ठीक नीचे पहुँचने में कामयाब रही। #इतिहास #पनडुब्बी #submarine #History #Fact #factsdaily #HistoricalFacts