केवल नरेंद्र मोदी का विरोध
राजनीति का काज ही कुछ ऐसा अनोखा है कि यहाँ छात्र तभी छात्र माना जाता है जब वह केंद्र सरकार के दरवाजे पर ताली या थाली बजा रहा हो। जैसे ही वही छात्र पंजाब, झारखंड, तेलंगाना या केरल जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों की सड़कों पर उतरता है, उसकी हैसियत रहस्यमयी ढंग से गायब हो जाती है। झारखंड में युवा सड़कों पर धूल फांकते हुए विरोध कर रहे हैं, पर मानवाधिकारों और छात्रों के हितों पर दिन-रात सोशल मीडिया के लाउडस्पीकर बजाने वाले 'बुद्धिजीवी' अचानक भूमिगत हो चुके हैं। दूर-दूर तक देखने पर भी उनका कोई अता-पता नहीं मिलता, जैसे वे किसी दूसरी दुनिया के प्राणी हों जिनका कैमरे की लाइट पड़े बिना बाहर निकलना वर्जित है। पंजाब में नौजवान अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन क्या किसी ने वहां डिंपल यादव या अरविंद केजरीवाल को सांत्वना के दो शब्द बोलते देखा? झारखंड में छात्र विरोध कर रहे हैं किसी ने कॉकरोचों को देखा क्या? तेलंगाना में जब युवा अपना भविष्य बचाने के लिए धरने पर बैठते हैं, तो संवेदनाओं का झरना बहाने वाली प्रियंका वाड्रा के आंसू पूरी तरह सूख जाते हैं। वहीं केरल की सड़कों पर छात्र अधिकारों का...