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PC की शुरुआत

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  3 अगस्त 1977 वह दिन है जब दुनिया का पहला बेहद लोकप्रिय घरेलू कंप्यूटर टीआरएस-80 (TRS-80) बाजार में आया था। इससे पहले कंप्यूटर बहुत बड़े, महंगे और केवल वैज्ञानिकों या बड़ी कंपनियों के काम आते थे। इस कंप्यूटर के आने के बाद पहली बार आम लोग और बच्चे इसे अपने घर पर इस्तेमाल कर सके। इसने कंप्यूटर को हर घर तक पहुँचाने का रास्ता साफ किया और यहीं से आज के आधुनिक कंप्यूटर और लैपटॉप की शुरुआत हुई। 3 अगस्त 1977 को यह ऐतिहासिक होम कंप्यूटर 599 डॉलर की कीमत पर लॉन्च किया गया। इस पैकेज के साथ ग्राहकों को 12-इंच का मॉनिटर, 4KB रैम, 1.77 MHz Z-80 प्रोसेसर, लैंग्वेज इंटरप्रेटर, कैसेट रिकॉर्डर और एक कैसेट टेप मिलती थी, जिसमें ‘ब्लैकजैक’ और ‘बैकगेमन’ नाम के दो गेम भी शामिल थे। इस कंप्यूटर को मिली प्रतिक्रिया ने कंपनी को भी हैरान कर दिया। जहां कंपनी ने शुरुआत में बेहद कम बिक्री का अनुमान लगाया था, वहीं महज पहले ही महीने में 5,000 TRS-80 कंप्यूटर बिक गए, जो कंपनी के शुरुआती अनुमान से 10 गुना अधिक थे। #आजकादिन #कंप्यूटर #PC #Computer #History #Fact #facts

पहला विश्व युद्ध 28 जुलाई 1914

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  प्रथम विश्व युद्ध मानव इतिहास का एक अत्यंत विनाशकारी और युगांतरकारी वैश्विक संघर्ष था, जिसकी शुरुआत आधिकारिक तौर पर 28 जुलाई 1914 को हुई थी। इस महायुद्ध का तात्कालिक कारण 28 जून 1914 को बोस्निया की राजधानी साराजेवो में ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के उत्तराधिकारी आर्कड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड और उनकी पत्नी की एक सर्बियाई राष्ट्रवादी द्वारा की गई हत्या थी। इस घटना से आक्रोशित होकर ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया को एक कठोर अल्टीमेटम दिया और उसकी मांगें पूरी न होने पर ठीक एक महीने बाद सर्बिया के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंक दिया। इस घोषणा ने यूरोप में बारूद के ढेर की तरह काम किया और देखते ही देखते पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। युद्ध की शुरुआत होते ही यूरोप में पहले से बनी गुप्त संधियों के जाल ने एक श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू कर दी। सर्बिया की रक्षा के लिए रूस आगे आया, जिसके जवाब में जर्मनी ने ऑस्ट्रिया-हंगरी का साथ देते हुए रूस और फ्रांस के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी। जब जर्मन सेना ने बेल्जियम के रास्ते फ्रांस पर हमला किया, तो बेल्जियम की तटस्थता की रक्षा के लिए ब्रिटेन भी इस जंग में कूद ...

कारगिल विजय दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है

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  कारगिल विजय दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है, जो सन 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों की ऐतिहासिक जीत और वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। वर्ष 2026 में देश इस शौर्य गाथा की 27वीं वर्षगांठ मना रहा है। #कारगिल #कारगिल_विजय_दिवस #KargilVijayDiwas #Bharat #Hindu #भारत #हिन्दू #IndianArmy

हुगली नदी पर भारत की पहली संगठित नौका दौड़ प्रतियोगिता

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  25 जुलाई 1813 को कोलकाता (तब कलकत्ता) में हुगली नदी पर भारत की पहली संगठित नौका दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता की शुरुआत ब्रिटिश अधिकारियों और स्थानीय व्यापारियों के सहयोग से हुई थी। उस समय हुगली नदी व्यापार और परिवहन का मुख्य केंद्र थी, इसलिए इस दौड़ को देखने के लिए नदी के किनारों पर हजारों लोगों की भारी भीड़ जमा हुई थी। इस आयोजन में विभिन्न प्रकार की पारंपरिक और आधुनिक नावों ने हिस्सा लिया था, जिसने भारत में जल क्रीड़ा (Water Sports) और आधुनिक खेल आयोजनों की नींव रखी। यह आयोजन इतना सफल रहा कि इसके बाद कोलकाता और भारत के अन्य हिस्सों में भी नियमित रूप से ऐसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाने लगा। India's First Boat Race  #WaterSports #BoatRace #Boat #Race #NaukaDaud #Nauka #नौका #नौकादौड़ #कलकत्ता #हुगली #Hugli

ऑल इंडिया रेडियो All india Radio

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  भारत में नियमित रेडियो प्रसारण की शुरुआत 23 जुलाई 1927 को बॉम्बे (अब मुंबई) से हुई थी। इस ऐतिहासिक दिन पर देश का पहला निजी रेडियो स्टेशन 'इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी' के तहत शुरू किया गया था। इसके ठीक एक महीने बाद, 26 अगस्त 1927 को कलकत्ता में भी एक रेडियो स्टेशन की शुरुआत की गई। भारतीय इतिहास में इस महत्वपूर्ण बदलाव की याद में हर साल 23 जुलाई को पूरे देश में 'राष्ट्रीय प्रसारण दिवस' के रूप में मनाया जाता है। शुरुआती दौर में यह सेवा निजी हाथों में थी, लेकिन वित्तीय संकट के कारण साल 1930 में ब्रिटिश सरकार ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया और इसका नाम बदलकर 'भारतीय राज्य प्रसारण सेवा' कर दिया। इसके बाद 8 जून 1936 को इस सेवा का नाम बदलकर 'ऑल इंडिया रेडियो' कर दिया गया, जो आज भी दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक प्रसारण संगठनों में से एक है। आजादी के बाद साल 1957 में ऑल इंडिया रेडियो को आधिकारिक तौर पर 'आकाशवाणी' नाम दिया गया, जिसका अर्थ है 'आसमान से आने वाली आवाज'। रेडियो ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम, सूचनाओं के प्रसार, शिक्षा और मनोरंजन में एक...

चन्द्रयान 2

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  22 जुलाई 2019 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश) से GSLV Mk III-M1 रॉकेट के माध्यम से चंद्रयान-2 का सफल प्रक्षेपण किया गया था। इस मिशन में एक ऑर्बिटर, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर शामिल थे, जिसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का अध्ययन करना था। #Fact #History #Chandrayan #इसरो #Isro

डॉलर दुनिया की सबसे ताक़तवर मुद्रा क्यों?

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अगर आपसे एक बात पूछी जाए कि क्या आपने कभी सोचा है कि ये जो ‘डॉलर’ है… ये सिर्फ एक काग़ज़ का टुकड़ा क्यों दुनिया की सबसे ताक़तवर मुद्रा बन गया? द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब पूरी दुनिया बर्बाद थी, तब एक देश था जिसके पास 22,000 टन सोना जमा हो चुका था – अमेरिका। यूरोपीय देश अपने युद्ध के लिए हथियार ख़रीदने के लिए अपना सोना बेच चुके थे… किसे? – अमेरिका को। युद्ध के बाद वाशिंगटन में एक बैठक हुई। सवाल उठा – अब दुनिया किस मुद्रा में व्यापार करेगी? ब्रिटेन का पाउंड टूट चुका था, कमज़ोर था। ऐसे में अमेरिका ने प्रस्ताव रखा – “डॉलर में व्यापार करो।” और क्या कहा? – “जो भी देश चाहे, 35 डॉलर देकर 28 ग्राम सोना ले सकता है।” दुनिया मान गई। और यहीं से डॉलर एक सामान्य मुद्रा नहीं, ‘वैश्विक शक्ति’ बन गया। लेकिन 1960 आते-आते सोने के दाम बढ़ने लगे। अब लोग 35 डॉलर में अमेरिका से सोना खरीदते और लंदन में 40 डॉलर में बेच देते। अमेरिका को खतरा महसूस हुआ क्योंकि उसका सोना तेजी से निकल रहा था। समस्या क्या थी? ब्रिटेन को उस समय लोन चाहिए था। लोन देने के बदले में अमेरिका ने लंदन का गोल्ड मार्केट ही बंद करवा दिया। इस...

संजय गाँधी अपनी गर्लफ्रेंड अंबिका सोनी

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संजय गाँधी अपनी गर्लफ्रेंड अंबिका सोनी के जन्मदिन पर किशोर कुमार का प्रोग्राम करना चाहते थे,पर किशोर दा ने मना कर दिया। फिर संजय गांधी ने 'ऑल इंडिया रेडियो' पर किशोर कुमार के गाने बजाने पर प्रतिबंध (19 महीने तक) लगवा दिया। तब किसी साहित्यकार ने अपना एवार्ड वापस नहीं किया था.!

लड़कीयाँ ज़रूर पड़े ( बाबू मैं प्रेग्नेन्ट हूँ )

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गर्ल - बाबू यह क्या कर रहे हो Boy - शादी के बाद जो पति करता है अपनी पत्नी के साथ Girl - तो अभी क्यो Boy - तो मैं क्या गलत कर रहा हूँ जो शादी के बाद करते है वो मैं पहले कर रहा हूँ .. मैं तुम्हारा पति हूँ मेरा हक़ है.. शादी से पहले Girl - यह अच्छी बात नही.. पर अपनी शादी तो नही हुई ना Boy - तू सोच रही है ना मैं टाइम पास कर रहा हूँ मैं तुझे अपनी पत्नी समझता हूँ ओके मैं आज के बाद तुझे टच भी नही करूँगा Girl - बाबू सोरी, मैं तुम्हारी हूँ. मुझ पर सिर्फ तुम्हारा ही अधिकार है. जो चाहे वो कर सकते हो.. सोरी Boy - Thankyou my sweet wife.. 2 महीने के बाद Girl - बाबू मैं प्रेग्नेन्ट हूँ Boy - क्या Girl - प्लीज मुझसे शादी कर लो Boy - पागल हो गयी हो क्या ? अभी नही कर सकता शादी.. मैं जोब भी नहीं करता..एक काम करो हॉस्पिटल जाकर Abortion करवा लेते हैं .. Girl - नहीं एक मां अपनी ही बच्ची को नही मार सकती Boy - ठीक है यह डिसाइड कर लो तुम्हें यह किसी और का बच्चा चाहिए या मैं Girl - क्या किसी और का बच्चा ? वाव बहुत अच्छा यह ही सुनना बाकी रह गया था Boy - और नही...

फ्री की रोटी

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अमेरिका के बाजारों में लोहे की जंजीरों में जकड़े, गले में पट्टा पहनकर जानवरों की तरह महज सौ साल पहले बिकने वाले निग्रो, बगैर किसी आरक्षण के व्हाइट हाउस तक पहुंच गये और ओपरा विनफ्रे जैसी तमाम हस्तियां मीडिया में किंग बन गई... हॉलीवुड पर विल स्मिथ जैसे तमाम नीग्रो का कब्जा है, अमेरिका के 30% जज नीग्रो है... . करीब 40% पुलिस और 32% आर्मी नीग्रो है... अमेरिका के 12 स्टेट के गवर्नर नीग्रो हैं. . अमेरिका के यह लोग कैसे इतने आगे पहूँच गए ? क्योंकि इन्होने जो किया अपने दम पर बिना किसी की मदद से किया, और आज इन लोगो पर कोई ऊंगली तक नहीं उठा सकता , गर्व है ऐसे लोगो पर और हमारे देश में सबसे पहले महाग्रंथ लिखने वाले वाल्मीकि महान संत रविदास, समाज सुधारक ज्योतिबा फुले, रानी झलकारी देवी और राजा सुहेलदेव संविधान लेखक और आठ विषय मे डाक्टरेक्ट डॉक्टर बाबा साहब के वंशज चन्द समाज के लोगो के बहकावे पर और फ्री की रोटी की आस में, अभी तक इसी झूठ पर ही रोते हैं कि उनको लिखने पढ़ने नहीं दिया गया. इनक्रेडिबल इंडिया इसी को कहते हैं !

इंसानों के बीच छिपे हुए गिद्ध

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एक गिद्ध का बच्चा अपने माता-पिता के साथ रहता था। एक दिन गिद्ध का बच्चा अपने पिता से बोला- "पिताजी, मुझे भूख लगी है।'' "ठीक है, तू थोड़ी देर प्रतीक्षा कर। मैं अभी भोजन लेकर आता हूँ ।'' कहते हुए गिद्ध उड़ने को उद्धत होने लगा। तभी उसके बच्चे ने उसे टोक दिया, "रूकिए पिताजी, आज मेरा मन इन्सान का गोश्त खाने का कर रहा है।'' "ठीक है, मैं देखता हूं।'' कहते हुए गिद्ध ने चोंच से अपने पुत्र का सिर सहलाया और बस्ती की ओर उड़ गया। बस्ती के पास पहुंच कर गिद्ध काफी देर तक इधर-उधर मंडराता रहा, पर उसे कामयाबी नहीं मिली। थक-हार का वह सुअर का गोश्त लेकर अपने घोंसले में पहुंचा। उसे देख कर गिद्ध का बच्चा बोला, "पिताजी, मैं तो आपसे इन्सान का गोश्त लाने को कहा था, और आप तो सुअर का गोश्त ले आए ?'' पुत्र की बात सुनकर गिद्ध झेंप गया। वह बोला, "ठीक है, तू थोड़ी देर प्रतीक्षा कर।'' कहते हुए गिद्ध पुन: उड़ गया। उसने इधर-उधर बहुत खोजा, पर उसे कामयाबी नहीं मिली। अपने घोंसले की ओर लौटते समय उसकी नजर एक मरी हुई गाय पर...

गलत फैसला

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एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये! हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ? यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा ! भटकते भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज की रात बीता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे ! रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे, उस पर एक उल्लू बैठा था। वह जोर से चिल्लाने लगा। हंसिनी ने हंस से कहा- अरे यहाँ तो रात में सो भी नहीं सकते। ये उल्लू चिल्ला रहा है। हंस ने फिर हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया है कि ये इलाका वीरान क्यूँ है ?? ऐसे उल्लू जिस इलाके में रहेंगे वो तो वीरान और उजड़ा रहेगा ही। पेड़ पर बैठा उल्लू दोनों की बातें सुन रहा था। सुबह हुई, उल्लू नीचे आया और उसने कहा कि हंस भाई, मेरी वजह से आपको रात में तकलीफ हुई, मुझे माफ़ करदो। हंस ने कहा- कोई बात नही भैया, आपका धन्यवाद! यह कहकर जैसे ही हंस अपनी हंसिनी को लेकर आगे बढ़ा पीछे से उल्...

सेकुलरिज्म (Secularism) क्या है ?

एक मुस्लिम बच्चे ने अपनी माँ से पूछा अम्मी, ये सेकुलरिज्म (धर्म निरपेक्षता) क्या होता है ? बुर्के में लिपटी महिला ने अपने बेटे को कहा, "बेटे, सेकुलरिज्म इस देश का वह सिस्टम है जिसमें हिन्दू करदाता जी-तोड़ मेहनत कर सरकार को इतना टैक्स चुकाता है जिससे कि हम जैसे अल्पसंख्यकों को फ्री आवास, मदरसों में फ्री शिक्षा, फ्री मेडिकल ट्रीटमेंट आदि सुविधाएँ मिलती रहें! मंदिरों की हुंडियों का धन हमारे लिए प्रयोग किया जा सके किन्तु मस्जिदों में क्या हो रहा है, उस तरफ कोई आँख उठाकर देखने की भी हिम्मत ना कर सके! हमें कानून का संरक्षण तो मिले किन्तु कोई कानून हम पर लागू नहीं हो! इस प्रकार के जन्नतनुमा माहौल को ही सेकुलरिज्म कहते हैं! बच्चे ने पूछा - “लेकिन अम्मी, इससे हिन्दू करदाता नाराज नहीं होते ?" "होते हैं बेटा, किन्तु उनके गुस्से को खत्म करने के लिए हम उनको साम्प्रदायिक बताना शुरू कर देते हैं, ताकि उनको शर्मिंदगी महसूस हो! इस तरह कुछ अड़ियल हिंदुओं को छोड़कर, बाक़ी सभी हिन्दू इस सेकुलरता नाम के जहर को प्रसाद समझ कर ना केवल ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लेते हैं बल्कि उन्हें अपने आपको सेक्...

वाहन संभल कर चलायें

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संसार में जन्म लेने के लिए माँ के गर्भ में 9 महीने रुक सकते है। चलने के लिए 2 वर्ष रुक सकते है, स्कूल में प्रवेश के लिए 3 वर्ष रुक सकते है, मतदान के लिए 18 वर्ष रुक सकते है, नौकरी के लिए 22 वर्ष रुक सकते है, शादी के लिये 25 -30 वर्ष रुक सकते है, इस तरह अनेक मौकों के लिए हम कितना इंतजार करते है। लेकिन, गाड़ी ओवरटेक करते समय 30 सेकंड भी नही रुकते,, बाद में एक्सीडेंट होने के बाद जिन्दा रहे तो एक्सीडेंट निपटाने के लिए कई घण्टे, हॉस्पिटल में कई दिन - महीने या साल निकाल देते है। कुछ सेकंड की गड़बड़ी कितना भयंकर परिणाम ला सकती है। जाने वाले चले जाते है, पीछे वालो का क्या। इस पर कभी विचार नहीं किया होगा आपने । फिर हर बार की तरह,नियति को दोष ।। इसलिये सही रफ्तार में सही दिशा में वाहन संभल कर चलायें और सुरक्षित घर पहुंचे। मासूम परिवार आपका घर पर इंतजार कर रहा है

आरक्षण - वरदान या अभिशाप

क्यो जिसको भी आरक्षण दिया जा रहा है वो सामान्य आदमी बन ही नहीं पा रहा है ? जैसे किसी व्यक्ति को आरक्षण दिया गया और वो किसी सरकारी नौकरी में आ गया ! अब उसका वेतन ₹5500 से ₹50000 तक महीना है पर जब उसकी संतान हुई तो फिर वही से शुरुआत ! फिर वही गरीब पिछड़ा और सवर्णों के अत्याचार का मारा पैदा हुआ । उसका पिता लाखों रूपए सालाना कमा रहा है तथा उच्च पद पर आसीन है। सारी सरकारी सुविधाए ले रहा है। वो खुद जिले के सबसे अच्छे स्कूल में पढ़ रहा है और सरकार उसे पिछड़ा मान रही है। सदियों से सवर्णों के अत्याचार का शिकार मान रही है। आपको आरक्षण देना है बिलकुल दो पर उसे नौकरी देने के बाद सामान्य तो बना दो । यह आरक्षण कब तक मिलता रहेगा उसे ?? इसकी भी कोई समय सीमा तो तय कर दो कि बस जाति विशेष में पैदा हो गया तो आरक्षण का हकदार हो गया। दादा जी जुल्म के मारे, बाप जुल्म का मारा तथा पोता भी जुल्म का मारा! वाह रे मेरे देश का दुर्भाग्य! जिस आरक्षण से उच्च पदस्थ अधिकारी , मन्त्री , प्रोफेसर , इंजीनियर, डॉक्टर भी पिछड़े ही रह जायें, ऐसे असफल अभियान को तुरंत बंद कर देना चाहिए । जिस कार्य से कोई आगे न बढ़ रहा ...