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Showing posts from August, 2026

भारत सरकार अधिनियम' Government of India Act 1858

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  2 अगस्त 1858 का वर्ष आधुनिक भारत के इतिहास में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण मोड़ था। साल 1857 में हुई देशव्यापी महान क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार को यह अहसास हो गया कि भारत जैसे विशाल देश का शासन अब ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी एक व्यापारिक कंपनी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसी वजह से ब्रिटिश संसद ने 2 अगस्त 1858 को 'भारत सरकार अधिनियम' (Government of India Act 1858) पारित किया। इस कानून के लागू होते ही भारत से ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन पूरी तरह समाप्त हो गया। भारत की सत्ता का पूरा नियंत्रण सीधे ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया यानी ब्रिटिश क्राउन के हाथों में सौंप दिया गया। इस ऐतिहासिक बदलाव के कारण भारत की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को बदल दिया गया। भारत के सर्वोच्च प्रशासनिक पद 'गवर्नर-जनरल' का नाम बदलकर 'वायसराय' कर दिया गया, जिसका सीधा मतलब था कि अब वह व्यक्ति भारत में ब्रिटिश क्राउन का सीधा प्रतिनिधि होगा। लॉर्ड कैनिंग को भारत का पहला वायसराय बनाया गया। इसके साथ ही, ब्रिटेन की संसद में भारत के मामलों को संभालने के लिए एक नए पद 'भारत सचिव' (Secretary of State ...

दादरा और नगर हवेली की मुक्ति का इतिहास

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  दादरा और नगर हवेली की मुक्ति का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक बेहद रोमांचक और गौरवशाली अध्याय है। भारत को 1947 में ब्रिटिश शासन से तो आजादी मिल गई थी, लेकिन दादरा और नगर हवेली का यह क्षेत्र तब भी पुर्तगाली औपनिवेशिक नियंत्रण में था। स्थानीय जनता इस दमनकारी विदेशी शासन से पूरी तरह मुक्त होना चाहती थी। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए साल 1954 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आजाद गोमांतक दल, यूनाइटेड फ्रंट ऑफ गोअंस और नेशनल कांग्रेस जैसे संगठनों के राष्ट्रवादी स्वयंसेवकों ने मिलकर एक गुप्त योजना बनाई। इस मुक्ति अभियान की शुरुआत 22 जुलाई 1954 की रात को हुई, जब फ्रांसिस मस्कारेन्हास और वामन देसाई के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने दादरा के पुर्तगाली पुलिस स्टेशन पर अचानक हमला कर दिया और वहां तैनात सुरक्षा बलों को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया। दादरा पर सफल नियंत्रण पाने के बाद देशभक्त स्वयंसेवकों ने नगर हवेली की तरफ रुख किया। पुर्तगाली सेना ने सिलवासा और नरोली जैसे इलाकों में भारतीयों को रोकने की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रवादियों के अटूट साहस और स्थानीय जनता के भारी समर्थन के आगे वे ...