15 अगस्त 1947 को इंडिया गेट पर तिरंगा फहराया मनोनीत प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा


 

15 अगस्त 1947 को नई दिल्ली में इंडिया गेट के पास स्थित प्रिंसेस पार्क में पहली बार आधिकारिक सार्वजनिक समारोह में तिरंगा झंडा फहराया गया था और इस ऐतिहासिक ध्वजारोहण को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ही संपन्न किया था। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि लाल किले की प्राचीर पर पहली बार तिरंगा इसके अगले दिन यानी 16 अगस्त 1947 को फहराया गया था। जवाहरलाल नेहरू को मनोनीत प्रधानमंत्री इसलिए कहा जाता है क्योंकि देश की आजादी के समय तुरंत आम चुनाव कराना संभव नहीं था।

वर्ष 1946 में भारत की अंतरिम सरकार के गठन और कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक बहुमत पूरी तरह से सरदार वल्लभभाई पटेल के पक्ष में था। उस समय कुल 15 प्रांतीय कांग्रेस समितियों में से 12 समितियों ने सर्वसम्मति से सरदार पटेल के नाम का प्रस्ताव अध्यक्ष पद के लिए भेजा था, जबकि शेष 3 समितियों ने किसी भी नाम का प्रस्ताव नहीं किया था। ब्रिटिश सरकार की योजना के अनुसार जो व्यक्ति कांग्रेस का अध्यक्ष बनता, उसे ही अंतरिम सरकार का मुखिया और आगे चलकर देश का पहला प्रधानमंत्री बनाया जाना तय था। इसके बावजूद, देश की एक भी प्रांतीय समिति ने जवाहरलाल नेहरू के नाम का प्रस्ताव नहीं दिया था।

मतलब नेहरू को एक भी प्रस्ताव का समर्थन या यूं कहे कि एक भी वोट नहीं मिला। मोहनदास करमचंद गांधी के कहने पर जीते हुए बहुमत प्राप्त सरदार पटेल ने बिना किसी विरोध के अपना नामांकन वापस ले लिया और इस तरह जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री पद पर मनोनीत हो गए। अगर जीते हुए सरदार पटेल ही प्रधानमंत्री बनते तो उन्हें मनोनीत नहीं बल्कि निर्वाचित प्रधानमंत्री कहा जाता।

भारत की आम जनता को सीधे मतदान करने का अधिकार वर्ष 1951-52 के पहले आम चुनावों में मिला, लेकिन यदि 1946 के आंतरिक सांगठनिक चुनाव के जनादेश का सम्मान किया जाता, तो सरदार पटेल निश्चित रूप से कांग्रेस और अंतरिम सरकार के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित मुखिया होते।

--- लोकेश कुशवाहा 


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