पीएम मोदी ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित किया है


 

नीट परीक्षा और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र आंदोलन में शामिल होकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी और अभद्र हमला बोलते हुए मंच से कहा "मोदी जी के अपने बच्चे नहीं हैं, इसलिए उन्हें नहीं पता कि बच्चे क्या होते हैं और वे बच्चों का दर्द नहीं समझते।" यह बयान पूरी तरह से उनकी राजनीतिक हताशा, नीतिगत शून्यता और घटिया मानसिकता का परिचायक है। जब कोई नेता प्रशासनिक विफलताओं पर तर्कसंगत बहस करने में नाकाम हो जाता है, तो वह इसी तरह के व्यक्तिगत और अमर्यादित बयानों का सहारा लेकर सुर्खियां बटोरने की कोशिश करता है।

अगर केजरीवाल के इस कुतर्क को सच मान भी लिया जाए कि बच्चे न होने के कारण मोदी जी को फर्क नहीं पड़ता, तो फिर सवाल सीधा केजरीवाल और बाकी विपक्षी कुनबे से है। केजरीवाल साहब, आपके तो बच्चे हैं, फिर वे इस छात्र आंदोलन में सड़कों पर धक्के खाते क्यों नहीं दिख रहे? वे जंतर-मंतर पर आकर प्रदर्शन का हिस्सा कब बनेंगे? प्रियंका गांधी वाड्रा के बच्चे इस आंदोलन में सड़कों पर क्यों नहीं उतरते? अखिलेश यादव के बच्चे भी तो तथाकथित 'जेन-जी' हैं, वे युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सड़कों पर लाठियां खाने क्यों नहीं आ रहे? राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, उद्धव ठाकरे या अलका लांबा क्या ये लोग अपने परिवार के किसी बच्चे को इस आंदोलन की आग में झोंकेंगे? जवाब बिल्कुल साफ है कभी नहीं।

ये तमाम राजनीतिक घराने अपने बच्चों को देश-विदेश के महंगे और बड़े शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित बिठाकर उनका करियर संवार रहे हैं, जबकि आम, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को अपनी राजनीति चमकाने के लिए सड़कों पर ढाल बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। केजरीवाल पंजाब में तो अधिकारों की मांग करने वाले बेकसूर छात्रों पर पुलिस से लाठीचार्ज करवाते हैं, और दिल्ली में आकर केंद्र सरकार को घेरने की नाकाम नौटंकी करते हैं। इस दोगलेपन की पोल अब पूरी तरह खुल चुकी है। गरीब के बच्चे सड़कों पर लाठी खाएं, अपना करियर और भविष्य दांव पर लगाएं, एफआईआर झेलें, और ये नेता उन पर राजनीतिक रोटियां सेकें और मलाई खाएं यही इन तथाकथित नेताओं का असली चरित्र है।

इस आंदोलन में बैठे जो भी असली देशभक्त, राष्ट्रवादी, भारतीय सेना का सम्मान करने वाले और अपने भविष्य के प्रति गंभीर छात्र हैं, उन्हें अपनी सोच और विवेक से इन राजनीतिक तिलचट्टों की मंशा को समझना होगा। ये नेता आपका इस्तेमाल सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए कर रहे हैं, कल को अगर आप पर कोई कानूनी मुसीबत आएगी तो ये अपना पल्ला झाड़ लेंगे और इनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। जिन विपक्षी नेताओं के पास विकास और नीतियों के मुद्दे पर मुकाबला करने की ताकत नहीं है, वे हताश होकर देश के प्रधान सेवक पर घटिया कीचड़ उछाल रहे हैं। पीएम मोदी ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित किया है और उनके लिए 140 करोड़ देशवासी ही उनका असली परिवार हैं।

देश के युवाओं का उज्ज्वल भविष्य केवल पारदर्शी व्यवस्था, कठोर कानूनों और कड़े प्रशासनिक सुधारों से सुनिश्चित हो सकता है। शिक्षा मंत्री होते हुए एक पे एक पव्वा फ्री देने वाली शराब नीति बनाने वाले, घटिया व्यक्तिगत टिप्पणियां और दूसरों के बच्चों को मोहरा बनाने वाली राजनीति कभी भी छात्रों का भला नहीं कर सकती।

लोकेश कुशवाहा 

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