14 अगस्त 1947 मुख्य ध्वजस्तंभ से ब्रिटिश हुकूमत के प्रतीक 'यूनियन जैक' को आधिकारिक रूप से नीचे उतारा गया था।
14 अगस्त 1947 की शाम भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और भावुक क्षणों में से एक थी। इसी दिन नई दिल्ली स्थित वायसराय हाउस (जिसे अब राष्ट्रपति भवन के नाम से जाना जाता है) के मुख्य ध्वजस्तंभ से ब्रिटिश हुकूमत के प्रतीक 'यूनियन जैक' को आधिकारिक रूप से नीचे उतारा गया था। यह केवल एक कपड़े के टुकड़े को उतारना नहीं था, बल्कि भारत की भूमि पर पिछले लगभग दो सौ वर्षों से चले आ रहे औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन और उसकी संप्रभुता के अंत की एक औपचारिक और वैश्विक घोषणा थी। इस ऐतिहासिक घटना को देखने और इतिहास को बदलते हुए महसूस करने के लिए वहां बड़ी संख्या में लोग और गणमान्य नागरिक मौजूद थे, जो सदियों की गुलामी के बाद आजादी की नई सुबह का इंतजार कर रहे थे।
इसके तुरंत बाद 14 और 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को नई दिल्ली के काउंसिल हाउस (अब पुराना संसद भवन) के केंद्रीय कक्ष में संविधान सभा का एक विशेष और ऐतिहासिक सत्र आयोजित किया गया। रात के ठीक बारह बजते ही जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब भारत ने जीवन और स्वतंत्रता में कदम रखा और देश की सत्ता पूरी तरह से भारतीय नेताओं के हाथों में सौंप दी गई। इसी सत्र में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' (नियति से साक्षात्कार) दिया था, जिसने हर भारतीय के दिल में एक नए और संप्रभु राष्ट्र के निर्माण का संकल्प जगाया।
अगली सुबह यानी 15 अगस्त 1947 को आजाद भारत की पहली औपचारिक शुरुआत हुई। इस पावन अवसर पर स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को पूरे गौरव और सम्मान के साथ फहराया गया। यूनियन जैक के उतरने और तिरंगे के शान से लहराने के बीच का यह समय भारत के उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, संघर्ष और तपस्या की जीत का गवाह बना जिन्होंने देश को ब्रिटिश राज से मुक्ति दिलाने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था।
--- लोकेश कुशवाहा
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