1983 के गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और क्यूबा के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो से गले मिलते हुए
कूटनीति और सार्वजनिक विमर्श के दोहरे मापदंडों पर यदि कभी खुली चर्चा हो, तो वर्तमान राजनीति के कुछ चेहरे पूरी तरह बेनकाब नजर आते हैं। जब इतिहास के पन्नों को पलटकर देखा जाए, तो 1983 के गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और क्यूबा के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो के बीच हुए उस बहुचर्चित गले मिलने को कांग्रेस दशकों तक अपनी कूटनीतिक जीत और वैश्विक प्रभाव के रूप में प्रस्तुत करती रही है। उस समय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों और आत्मीयता को विदेश नीति की परिपक्वता बताया गया था। लेकिन आज जब वही राजनीतिक विरासत संभालने वाले नेता राहुल गांधी मंचों से अंतरराष्ट्रीय स्तर की महिला नेताओं और राजनयिक शिष्टाचार पर स्तरहीन टिप्पणियां करते हैं, तो उनकी समझ और कथनी-करनी का खोखलापन साफ दिखाई देने लगता है।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर सार्वजनिक मंचों से जिस तरह की हल्की, फूहड़ और अशोभनीय बयानबाजी की गई, उसने राजनीतिक विमर्श के स्तर को बेहद नीचे गिरा दिया है। सवाल यह उठता है कि यदि ठीक उसी तरह की द्विअर्थी और भद्दी टिप्पणियां कभी हवाना में इंदिरा गांधी और फिदेल कास्त्रो की उस ऐतिहासिक मुलाकात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जातीं, तो क्या कांग्रेस इसे गरिमापूर्ण मानती? किसी संप्रभु राष्ट्र की चुनी हुई महिला राष्ट्राध्यक्ष के प्रति मंच से ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग न केवल कूटनीतिक मर्यादा का हनन है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के प्रति संकीर्ण और सामंती मानसिकता का भी स्पष्ट प्रमाण है।
राजनीतिक विरोध की भी अपनी एक गरिमा और सीमा होती है। जब देश की एक प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और प्रवक्ता वैश्विक संबंधों को सतही चुटकुलों और अशोभनीय तंज में समेटने का प्रयास करते हैं, तो वे केवल स्वयं को ही नहीं, बल्कि देश की कूटनीतिक छवि को भी ठेस पहुंचाते हैं। स्वयं को लोकतंत्र और नारी सम्मान का स्वघोषित पैरोकार बताने वालों को आत्ममंथन करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय शिष्टाचार को लांघकर की गई ऐसी फूहड़ टिप्पणियां उनकी बौद्धिक गहराई को नहीं, बल्कि उनके नैतिक दिवालियापन को दर्शाती हैं। इतिहास को अपनी सुविधानुसार भुनाने और दूसरों पर स्तरहीन प्रहार करने का यह दोहरा चरित्र अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है।
--- लोकेश कुशवाहा
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