महान स्वतंत्रता सेनानी कनाईलाल दत्त


 

भारत माँ के वीर सपूत और महान स्वतंत्रता सेनानी कनाईलाल दत्त का जन्म 30 अगस्त 1888 को बंगाल के हुगली जिले के चंदननगर में हुआ था। वह देश की आजादी के लिए मात्र 20 वर्ष की आयु में हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए थे। अपने छात्र जीवन के दौरान ही वह बंगाल के प्रसिद्ध क्रांतिकारी संगठन 'अनुशीलन समिति' और 'युगांतर' समूह के सक्रिय सदस्य बन गए थे, जहाँ उन्होंने 1905 में हुए बंगाल विभाजन का कड़ा विरोध किया था।

साल 1908 में मुजफ्फरपुर के दमनकारी अंग्रेज मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड पर हुए हमले के बाद ब्रिटिश सरकार ने कड़ी कार्रवाई की। इस अलीपुर बम कांड के सिलसिले में कनाईलाल दत्त, अरविन्द घोष और बारीन्द्र कुमार घोष सहित कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर अलीपुर जेल में डाल दिया गया। इसी दौरान जेल में बंद क्रांतिकारियों में से एक, नरेन्द्र नाथ गोस्वामी (नरेन), अंग्रेजों का सरकारी मुखबिर बन गया और उसने दल के कई गुप्त राज अंग्रेजों के सामने उगल दिए।

क्रांतिकारी आंदोलन और अपने साथियों को सुरक्षित रखने के लिए कनाईलाल दत्त और सत्येन्द्रनाथ बोस ने जेल के भीतर ही एक साहसिक योजना बनाई। उन्होंने जेल के अस्पताल में ही देशद्रोही नरेन गोस्वामी को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया। इस ऐतिहासिक कदम के बाद ब्रिटिश अदालत ने कनाईलाल दत्त को मौत की सजा सुनाई, लेकिन उन्होंने इस फैसले के खिलाफ कोई भी कानूनी अपील करने से साफ इनकार कर दिया। अंततः 10 नवंबर 1908 को कोलकाता की अलीपुर सेंट्रल जेल में उन्हें फांसी दे दी गई। खुदीराम बोस के बाद फांसी पर चढ़ने वाले वह देश के दूसरे सबसे युवा क्रांतिकारी थे, जिनकी वीरता और सर्वोच्च बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता है।

-- लोकेश कुशवाहा 


#इतिहास #कनाईलाल_दत्त #KanailalDutt #Bharat #FreedomFighter #History #factshindi #HindiFact #historyofindia #historyfacts #Hugli #Bengal #historylovers

Comments

Popular posts from this blog

पैगंबर मोहम्मद के जन्म से पहले भी अमरनाथ गुफा में हो रही है पूजा-अर्चना

पीएम मोदी ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित किया है

सरदार पटेल और नेहरू के बीच वैचारिक टकराव