बाबा हरभजन सिंह की आत्मा देश की सीमाओं की रक्षा कर रही है।
भारतीय सेना के वीर सैनिक बाबा हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 को पंजाब के गुजरावाला जिले के सदराना गांव में हुआ था, जो वर्तमान समय में पाकिस्तान का हिस्सा है। वे महज 19 वर्ष की आयु में 12 फरवरी 1966 को भारतीय सेना की पंजाब रेजिमेंट में बतौर सिपाही शामिल हुए थे। पूर्वी सिक्किम के नाथू ला पास के पास सेना में अपनी सेवा देते हुए 4 अक्टूबर 1968 को एक दर्दनाक हादसे में उनकी शहादत हुई। खच्चरों का काफिला ले जाने के दौरान पैर फिसलने की वजह से वे एक गहरे नाले में गिर गए थे। उनकी मृत्यु के बाद से जुड़ी एक अद्भुत मान्यता है कि वे अपने एक साथी सैनिक के सपने में आए और उन्होंने अपने पार्थिव शरीर की सटीक लोकेशन बताई, जिसके बाद सेना ने उनके शव को उसी स्थान से बरामद किया।
सैनिकों और स्थानीय लोगों के बीच यह दृढ़ विश्वास है कि शहीद होने के बाद भी बाबा हरभजन सिंह की आत्मा देश की सीमाओं की रक्षा कर रही है। ऐसा माना जाता है कि वे चीनी सेना की किसी भी संदिग्ध गतिविधि के बारे में भारतीय सैनिकों को सपने में आकर पहले ही सचेत कर देते हैं। उनके प्रति सम्मान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत और चीन के बीच होने वाली हर आधिकारिक फ्लैग मीटिंग में चीनी सेना भी उनके आदर में एक कुर्सी खाली रखती है। पूर्वी सिक्किम में उनके सम्मान में एक भव्य बाबा हरभजन सिंह मंदिर का निर्माण किया गया है, जहाँ उनकी वर्दी, जूते और बिस्तर आज भी पूरी पवित्रता के साथ सहेज कर रखे जाते हैं, और भारतीय सेना के जवान व आम नागरिक वहाँ शीश नवाने आते हैं।
-- लोकेश कुशवाहा
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