भारत में पहली बार उँगलियों के निशान का उपयोग किया
28 जुलाई 1858 को भारतीय सिविल सेवा के ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम जेम्स हर्शेल ने भारत में पहली बार उँगलियों के निशान का उपयोग किया था। बंगाल के जंगीपुर में तैनात हर्शेल ने एक स्थानीय व्यापारी राजधर कोनाई के साथ सड़क निर्माण सामग्री की आपूर्ति का एक आधिकारिक अनुबंध किया था। इस समझौते पर हस्ताक्षर को धोखाधड़ी से बचाने और भविष्य में मुकरने से रोकने के लिए उन्होंने व्यापारी के दाहिने हाथ की हथेली और उँगलियों की छाप कागज़ पर ली थी। यह कदम प्रशासनिक और कानूनी कार्यों में पहचान सुनिश्चित करने के लिए फिंगरप्रिंट तकनीक के इस्तेमाल की शुरुआत बना, जो बाद में चलकर आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हुआ।
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