Kargil Vijay Diwas कारगिल विजय दिवस


 

कारगिल युद्ध 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में लड़ा गया एक भीषण सशस्त्र संघर्ष था। इस युद्ध की शुरुआत मई 1999 में हुई, जब पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा का उल्लंघन करके कारगिल, द्रास, बटालिक और तुर्तुक सेक्टर की रणनीतिक चोटियों पर गुप्त रूप से कब्जा कर लिया था। पाकिस्तान का मुख्य उद्देश्य श्रीनगर और लेह को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 1डी को काटना था, ताकि सियाचिन ग्लेशियर और लद्दाख का संपर्क बाकी भारत से पूरी तरह टूट जाए। मई के शुरुआती हफ्ते में जब स्थानीय चरवाहों ने इन घुसपैठियों को देखा, तब भारतीय सेना को इस बड़े पैमाने की घुसपैठ का पता चला। इसके तुरंत बाद भारतीय सेना ने दुश्मन को खदेड़ने के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की, जिसे आधिकारिक तौर पर 'ऑपरेशन विजय' नाम दिया गया था।

यह युद्ध सैन्य इतिहास के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण युद्धों में से एक माना जाता है, क्योंकि यह 16,000 से 18,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर लड़ा गया था। भारतीय सैनिकों को न केवल दुश्मन का सामना करना था, बल्कि माइनस 15 डिग्री तक गिरने वाले तापमान, ऑक्सीजन की भारी कमी और दुर्गम खड़ी पहाड़ियों जैसी कठिन परिस्थितियों से भी लड़ना था। दुश्मन ऊंचाई पर बने मजबूत बंकरों में सुरक्षित बैठा था, जहां से नीचे से ऊपर चढ़ते भारतीय जवानों पर सीधे हमले करना आसान था। इस विकट स्थिति में भारतीय वायु सेना ने 'ऑपरेशन सफेद सागर' के तहत लड़ाकू विमानों से हवाई हमले शुरू किए और भारतीय नौसेना ने 'ऑपरेशन तलवार' के जरिए अरब सागर में आक्रामक घेराबंदी करके पाकिस्तान के समुद्री व्यापारिक मार्ग को रोक दिया। भारतीय तोपखाने की बोफोर्स तोपों ने इस युद्ध में दुश्मन के बंकरों को नेस्तनाबूद करने में बेहद निर्णायक और ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

भारतीय जांबाजों ने एक-एक करके तोलोलिंग, टाइगर हिल और पॉइंट 4875 जैसी बेहद महत्वपूर्ण चोटियों पर दोबारा कब्जा कर लिया। तकरीबन दो महीने से अधिक समय तक चले इस भीषण युद्ध का अंत 26 जुलाई 1999 को हुआ, जब भारतीय सेना ने कारगिल क्षेत्र से सभी घुसपैठियों को पूरी तरह खदेड़कर तिरंगा फहराया और 'ऑपरेशन विजय' की सफल समाप्ति की घोषणा की। भारत को इस ऐतिहासिक जीत के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी, जिसमें देश के 527 वीर सैनिक शहीद हुए और 1,300 से अधिक जवान गंभीर रूप से घायल हुए। इस युद्ध में अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव और राइफलमैन संजय कुमार को देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया और भारत ने अपनी संप्रभुता की रक्षा करते हुए विश्व पटल पर एक बार फिर अपनी सैन्य शक्ति का लोहा मनवाया।

--- लोकेश कुशवाहा 

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