जब अमेरिकी वायुसेना के बी-29 बमवर्षक विमान 'एनोला गे' ने जापान के औद्योगिक शहर हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया।
6 अगस्त 1945 की सुबह 8:15 बजे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इतिहास की सबसे विनाशकारी घटना घटी, जब अमेरिकी वायुसेना के बी-29 बमवर्षक विमान 'एनोला गे' ने जापान के औद्योगिक शहर हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया। कर्नल पॉल टिबेट्स द्वारा उड़ाए गए इस विमान से छोड़े गए यूरेनियम आधारित बम को 'लिटिल बॉय' कोडनेम दिया गया था। इस भीषण विस्फोट के कारण पल भर में पूरा शहर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया और अत्यधिक तापमान तथा तीव्र शॉकवेव्स की वजह से लगभग 70,000 से 80,000 लोग तुरंत मारे गए। यह तबाही यहीं नहीं रुकी क्योंकि परमाणु विकिरण की वजह से साल के अंत तक मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर करीब 140,000 तक पहुंच गई, और आने वाली पीढ़ियां भी इसके भयानक जैविक प्रभावों को झेलने के लिए मजबूर हुईं।
इस महाविनाश के ठीक तीन दिन बाद, यानी 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के दूसरे प्रमुख शहर नागासाकी पर 'फैट मैन' नामक एक और प्लूटोनियम आधारित परमाणु बम गिराया। इन दोनों परमाणु हमलों की भयावहता और अभूतपूर्व क्षति को देखते हुए आखिरकार 15 अगस्त 1945 को जापान के सम्राट हिरोहितो ने बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण की घोषणा कर दी, जिसके साथ ही आधिकारिक रूप से द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हुआ। वर्तमान समय में हिरोशिमा को पूरी तरह से दोबारा बसाया जा चुका है, और वहां स्थापित पीस मेमोरियल पार्क आज भी दुनिया को युद्ध की विभीषिका की याद दिलाता है। यह ऐतिहासिक घटना आज वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन और अंतरराष्ट्रीय शांति व सौहार्द बनाए रखने के लिए एक बड़े प्रतीक के रूप में जानी जाती है।
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