उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का जन्म


 

द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में जापानी साम्राज्य के पतन के साथ ही कोरिया के आधुनिक विभाजन की कहानी शुरू हुई। वर्ष 1910 से ही कोरियाई प्रायद्वीप पर जापानी सेना का क्रूर औपनिवेशिक शासन था। जब वर्ष 1945 में मित्र देशों की जीत तय हो गई, तो जापानी सेना को आत्मसमर्पण कराने और कोरिया को स्वतंत्र कराने की योजना बनाई गई। इसी दौरान अगस्त 1945 में सोवियत संघ ने जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और उसकी लाल सेना ने तेजी से कोरिया के उत्तरी हिस्से में प्रवेश करना शुरू कर दिया। सोवियत सेना की इस त्वरित प्रगति को देखकर अमेरिका चिंतित हो गया क्योंकि वह पूरे कोरियाई प्रायद्वीप पर साम्यवाद का नियंत्रण नहीं चाहता था।

अमेरिकी अधिकारियों ने आनन-फानन में एक आपातकालीन योजना तैयार की और सोवियत संघ के सामने कोरिया को दो हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव रखा। इसके लिए उन्होंने नेशनल ज्योग्राफिक के एक नक्शे का उपयोग करके प्रायद्वीप के ठीक बीच से गुजरने वाली 38वीं समानांतर अक्षांश रेखा को विभाजन का आधार चुना। अमेरिका ने प्रस्ताव दिया कि इस रेखा के उत्तर में जापानी सेना सोवियत संघ के सामने आत्मसमर्पण करेगी और दक्षिण में अमेरिकी सेना के सामने। सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को अप्रत्याशित रूप से स्वीकार कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप अगस्त के मध्य तक उत्तरी भाग पूरी तरह सोवियत नियंत्रण में आ गया और सितंबर की शुरुआत में अमेरिकी सेना ने दक्षिणी भाग की कमान संभाल ली।

यह विभाजन शुरुआत में केवल एक अस्थायी सैन्य व्यवस्था थी, जिसका उद्देश्य जापानी सैनिकों को वहां से बाहर निकालना और अंततः एक स्वतंत्र, एकीकृत कोरियाई सरकार की स्थापना करना था। हालांकि, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के तुरंत बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध की प्रतिद्वंद्विता शुरू हो गई। दोनों महाशक्तियों के बीच अविश्वास इतना बढ़ गया कि वे एक संयुक्त सरकार के गठन पर सहमत नहीं हो सके। सोवियत संघ ने उत्तर में एक कम्युनिस्ट विचारधारा वाली सरकार को बढ़ावा दिया, जबकि अमेरिका ने दक्षिण में एक पूंजीवादी और पश्चिम-समर्थक शासन का समर्थन किया।

विभाजन की यह रेखा समय के साथ स्थायी होती चली गई और वर्ष 1948 में दोनों क्षेत्रों ने आधिकारिक तौर पर खुद को अलग देश घोषित कर दिया। उत्तर में किम इल-सुंग के नेतृत्व में 'डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया' (उत्तर कोरिया) और दक्षिण में सिंगमैन री के नेतृत्व में 'रिपब्लिक ऑफ कोरिया' (दक्षिण कोरिया) की स्थापना हुई। दोनों ही सरकारें खुद को पूरे कोरिया का वैध शासक मानती थीं, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया। अंततः इसी वैचारिक मतभेद और क्षेत्रीय दावों के कारण 25 जून 1950 को कोरियाई युद्ध भड़क उठा, जिसने इस अस्थायी विभाजन को हमेशा के लिए एक दर्दनाक और स्थायी वास्तविकता में बदल दिया।

--- Lokesh Kushwaha


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