1 सितंबर 1926 को राजस्थान के जोधपुर जिले के बोरुंदा गाँव में जनमे विजयदान देथा


 

1 सितंबर 1926 को राजस्थान के जोधपुर जिले के बोरुंदा गाँव में जनमे विजयदान देथा राजस्थानी भाषा के सबसे प्रसिद्ध और महान साहित्यकार माने जाते हैं। साहित्य जगत में उन्हें आदर से 'बिज्जी' और 'राजस्थान का शेक्सपियर' भी कहा जाता है। उन्होंने अपने पूरे जीवन में राजस्थानी लोककथाओं का गहन अध्ययन किया और उन्हें आधुनिक गद्य शैली में ढालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनका निधन 10 नवंबर 2013 को 87 वर्ष की आयु में हुआ था।

उनकी साहित्यिक कृतियों में सबसे प्रमुख स्थान 'बातां री फुलवारी' का है, जो राजस्थानी लोक कथाओं का एक विशाल 14 खंडों का संग्रह है। इसके अलावा उन्होंने 'दुविधा', 'अलेखूँ हिटलर', 'चौधराईन की चतुराई', 'सपनप्रिया', 'महामिलन' और 'बापू के तीन हत्यारे' जैसी कई कालजयी रचनाएँ लिखीं। उन्होंने प्रसिद्ध संस्कृति कर्मी कोमल कोठारी के साथ मिलकर बोरुंदा में 'रूपायन संस्थान' की स्थापना भी की थी, जो आज भी राजस्थानी लोक कला, संगीत और परंपराओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

विजयदान देथा की कहानियों का भारतीय सिनेमा और रंगमंच पर भी गहरा प्रभाव रहा है। उनकी प्रसिद्ध कहानी 'दुविधा' पर साल 1973 में मणि कौल ने इसी नाम से एक क्लासिक फिल्म बनाई थी, और बाद में साल 2005 में अमोल पालेकर ने इसी कहानी पर शाहरुख खान और रानी मुखर्जी के साथ 'पहेली' फिल्म का निर्माण किया। इसके अतिरिक्त हबीब तनवीर का प्रसिद्ध नाटक 'चरणदास चोर' और प्रकाश झा द्वारा निर्देशित फिल्म 'परिणति' भी देथा जी की ही कहानियों पर आधारित हैं।

साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। साल 1974 में उन्हें 'बातां री फुलवारी' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला, जो राजस्थानी भाषा के लिए दिया गया पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार था। इसके बाद भारत सरकार ने उन्हें साल 2007 में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से विभूषित किया। साल 2012 में उन्हें राजस्थान सरकार का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 'राजस्थान रत्न' दिया गया, और इसके अलावा वे बिहारी पुरस्कार और साहित्य चूड़ामणि पुरस्कार से भी सम्मानित हुए। वर्ष 2011 में साहित्य के क्षेत्र में उनके विशाल योगदान को देखते हुए उनका नाम प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया गया था।

-- लोकेश कुशवाहा 


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