प्रधानमंत्री मोदी जी के हाथ में ये वॉच देखिए। पहली नज़र में लगेगा कि शायद ये कोई लग्ज़री रोलेक्स या ओमेगा होगी, लेकिन इसकी असली कहानी किसी महंगे स्विस ब्रांड से कहीं ज्यादा दिलचस्प है। इस वॉच के डायल पर लगा है
प्रधानमंत्री मोदी जी के हाथ में ये वॉच देखिए। पहली नज़र में लगेगा कि शायद ये कोई लग्ज़री रोलेक्स या ओमेगा होगी, लेकिन इसकी असली कहानी किसी महंगे स्विस ब्रांड से कहीं ज्यादा दिलचस्प है। इस वॉच के डायल पर लगा है 1947 का एक रेयर वन रुपी कॉइन, जिस पर वॉकिंग टाइगर बना हुआ है। आज़ादी के दौर के इस सिक्के को नए भारत के प्रतीक से जोड़कर देखा जाता है।
इस कहानी की शुरुआत होती है जयपुर के गौरव मेहता से, जिन्हें बचपन से पुराने सिक्के और स्टैम्प्स कलेक्ट करने का शौक था। एक दिन उन्होंने एक साधारण क्वार्ट्ज वॉच को खोलकर उसका डायल निकाल दिया और अपने कलेक्शन से एक विंटेज ब्रिटिश इंडियन कॉइन को उसके अंदर फिट कर दिया। वॉच तैयार हुई तो उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि ये छोटा सा प्रयोग उनकी पूरी ज़िंदगी बदलने वाला है।
जहां भी गौरव ये वॉच पहनकर जाते, लोग उनसे उसी के बारे में पूछने लगते। किसी ने नहीं पूछा कि ये रोलेक्स है या ओमेगा। लोगों की दिलचस्पी इस बात में थी कि आखिर इस घड़ी के डायल पर लगा ये पुराना सिक्का क्या कहानी कहता है। यही वो पल था, जब गौरव को समझ आया कि लोगों को सिर्फ घड़ी नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपी कहानी भी चाहिए।
2013 में गौरव ने अपनी कार बेच दी और अपनी खुद की जयपुर वॉच कंपनी शुरू कर दी। शुरुआत आसान नहीं थी। उन्हें लगातार रिजेक्शन मिला। लोगों ने यहां तक कहा कि भारतीय ग्राहक लग्ज़री वॉच के लिए सिर्फ स्विस ब्रांड्स पर ही पैसा खर्च करते हैं। लेकिन गौरव ने हार नहीं मानी।
उन्होंने फेसबुक के जरिए मार्केटिंग शुरू की और ताज तथा ओबेरॉय जैसे प्रतिष्ठित होटलों में छोटे-छोटे काउंटर्स लगाए। धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और एक भारतीय ब्रांड ने अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी।
फिर 2023 में गौरव शार्क टैंक इंडिया के मंच पर पहुंचे। वहां किसी भी शार्क ने उनके बिजनेस में इन्वेस्ट नहीं किया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। शो के बाद उनकी वेबसाइट पर रातों-रात करीब पचास हजार लोगों का ट्रैफिक आ गया। यानी निवेश भले ही नहीं मिला, लेकिन देशभर में पहचान जरूर मिल गई।
गौरव ने अमिताभ बच्चन को केबीसी के सेट पर एक बेस्पोक वॉच भी गिफ्ट की। लेकिन उनकी कहानी का सबसे बड़ा मोमेंट तब आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कलाई पर उनके ब्रांड की वॉच दिखाई दी।
सोचिए, जिस सफर की शुरुआत एक लड़के ने अपने शौक के लिए एक साधारण घड़ी खोलकर और उसमें एक पुराना सिक्का लगाकर की थी, वही विचार आज देश के प्रधानमंत्री की कलाई तक पहुंच चुका है।
गौरव मेहता की कहानी सिर्फ एक वॉच ब्रांड की कहानी नहीं है। ये इस बात की मिसाल है कि भारतीय लग्ज़री को हमेशा पश्चिमी ब्रांड्स की नकल करने की जरूरत नहीं है। हमारे पास अपनी कहानी है, अपना इतिहास है और उसे दुनिया के सामने पेश करने का अपना तरीका भी है।
अगर आपको अपनी कलाई पर इतिहास का एक टुकड़ा पहनने का मौका मिले, तो आप अपनी घड़ी में कौन सा साल या अपनी ज़िंदगी की कौन सी खास याद संजोना चाहेंगे? कमेंट में जरूर बताइए।
-- लोकेश कुशवाहा
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