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प्रधानमंत्री मोदी जी के हाथ में ये वॉच देखिए। पहली नज़र में लगेगा कि शायद ये कोई लग्ज़री रोलेक्स या ओमेगा होगी, लेकिन इसकी असली कहानी किसी महंगे स्विस ब्रांड से कहीं ज्यादा दिलचस्प है। इस वॉच के डायल पर लगा है

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  प्रधानमंत्री मोदी जी के हाथ में ये वॉच देखिए। पहली नज़र में लगेगा कि शायद ये कोई लग्ज़री रोलेक्स या ओमेगा होगी, लेकिन इसकी असली कहानी किसी महंगे स्विस ब्रांड से कहीं ज्यादा दिलचस्प है। इस वॉच के डायल पर लगा है 1947 का एक रेयर वन रुपी कॉइन, जिस पर वॉकिंग टाइगर बना हुआ है। आज़ादी के दौर के इस सिक्के को नए भारत के प्रतीक से जोड़कर देखा जाता है। इस कहानी की शुरुआत होती है जयपुर के गौरव मेहता से, जिन्हें बचपन से पुराने सिक्के और स्टैम्प्स कलेक्ट करने का शौक था। एक दिन उन्होंने एक साधारण क्वार्ट्ज वॉच को खोलकर उसका डायल निकाल दिया और अपने कलेक्शन से एक विंटेज ब्रिटिश इंडियन कॉइन को उसके अंदर फिट कर दिया। वॉच तैयार हुई तो उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि ये छोटा सा प्रयोग उनकी पूरी ज़िंदगी बदलने वाला है। जहां भी गौरव ये वॉच पहनकर जाते, लोग उनसे उसी के बारे में पूछने लगते। किसी ने नहीं पूछा कि ये रोलेक्स है या ओमेगा। लोगों की दिलचस्पी इस बात में थी कि आखिर इस घड़ी के डायल पर लगा ये पुराना सिक्का क्या कहानी कहता है। यही वो पल था, जब गौरव को समझ आया कि लोगों को सिर्फ घड़ी नहीं, बल्कि उसके पीछे ...

सुकेश चंद्रशेखर। इंडिया का नंबर वन ठग

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  इल्ज़ाम है कि इस आदमी ने बैंकों से नहीं, सीधे लोगों से 200 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा की ठगी की। नाम है सुकेश चंद्रशेखर। इंडिया का नंबर वन ठग बनने की इसकी कहानी भी कमाल की है। किसी को भी ठगना हो तो इसका सिंपल फॉर्मूला था पहले सामने वाले की ज़िंदगी की सबसे बड़ी परेशानी ढूँढो और फिर तीन सुनहरे शब्द बोल दो: “अभी ठीक करके देता हूँ।” 🤣 कहानी शुरू होती है एक साड़ी की दुकान से। महाशय एक साड़ी ब्रांड वाले के पास पहुँचे और बोले, “भाईसाब, आपकी दुकान के अंदर मैं कैटरीना कैफ को ले आऊँगा।” बस, इतनी सी बात और भाईसाब ने 20 लाख रुपये निकाल लिए। मज़े की बात ये कि उस वक्त ये भाई सिर्फ़ 17 साल का था। हालांकि कैटरीना कैफ तो छोड़िए, मोहम्मद कैफ भी दुकान पर नहीं आया। फिर भाई को पता चला कि उसके किसी दूर के रिश्तेदार की जमीन बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी के पास फँसी हुई है। भाई रिश्तेदार के पास पहुँचा और फिर वही पुराना डायलॉग “अभी ठीक करके देता हूँ।” सामने वाले ने एक करोड़ रुपये दे दिए और भाईसाब फिर गायब। 😁 लेकिन असली खेल 2016 में शुरू हुआ, जब सुकेश ब्रो ने जंगल में रहकर शेर के मुँह में हाथ डाल दिया। जयलल...

1 सितंबर 1798 को हैदराबाद के निजाम अली खान और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई सहायक संधि भारतीय इतिहास का एक बड़ा मोड़ थी, जिसने भारत की स्वतंत्रता को गहरे जख्म दिए

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  1 सितंबर 1798 को हैदराबाद के निजाम अली खान और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई सहायक संधि भारतीय इतिहास का एक बड़ा मोड़ थी, जिसने भारत की स्वतंत्रता को गहरे जख्म दिए। गवर्नर-जनरल लॉर्ड वेलेज़ली की इस कूटनीतिक चाल को स्वीकार करने वाली हैदराबाद पहली रियासत बनी। मराठों और टीपू सुल्तान के डर से निजाम ने अपने राज्य में ब्रिटिश सेना रखना स्वीकार तो कर लिया, लेकिन बदले में अपनी संप्रभुता पूरी तरह खो दी। इस संधि के कारण निजाम को अपने दरबार से फ्रांसीसियों को निकालना पड़ा और अपनी विदेश नीति अंग्रेजों के हाथों में सौंपनी पड़ी। इस व्यवस्था ने हैदराबाद को अंदर से खोखला कर दिया क्योंकि सेना का भारी-भरकम खर्च उठाने के लिए जनता पर करों का बोझ लाद दिया गया, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो गई और शासक केवल अंग्रेजों की कठपुतली बनकर रह गए। पूरे भारत के संदर्भ में इस संधि के बेहद विनाशकारी और गलत परिणाम सामने आए। इसने एक-एक कर भारतीय रियासतों की स्वतंत्रता को पूरी तरह लील लिया। इस नीति के कारण भारतीय शासक अपनी ही सेना से हाथ धो बैठे और पूरी तरह ब्रिटिश सुरक्षा पर निर्भर हो गए, जिसने...

1 सितंबर 1942 को प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रासबिहारी बोस ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय राष्ट्रीय सेना यानी आईएनए (INA) की स्थापना की आधिकारिक घोषणा की थी

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  1 सितंबर 1942 को प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रासबिहारी बोस ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय राष्ट्रीय सेना यानी आईएनए (INA) की स्थापना की आधिकारिक घोषणा की थी। इस सेना के गठन में कैप्टन मोहन सिंह की मुख्य भूमिका थी, जिन्हें इसका पहला सेनापति बनाया गया था। इस फौज में ज्यादातर वे भारतीय सैनिक शामिल थे, जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने युद्ध बंदी बना लिया था। इस सेना का मुख्य उद्देश्य जापानी सेना के सहयोग से भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आज़ाद कराना था। हालांकि जापानी अधिकारियों के साथ मतभेदों के कारण दिसंबर 1942 में यह पहली सेना भंग हो गई थी। इसके बाद जुलाई 1943 में रासबिहारी बोस ने इस आंदोलन की कमान नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सौंप दी, जिन्होंने इसका पुनर्गठन करके इसे 'आजाद हिंद फौज' के रूप में एक नई और ऐतिहासिक पहचान दी। -- लोकेश कुशवाहा  #भारत #रासबिहारीबॉस #इतिहास #RasBihariBose #Fact #History #factsinhindi #factsdaily #historyfacts #historyofindia #historymatters #Freedom

स्वतंत्र भारत में 1 सितंबर 1947 को आधिकारिक 'भारतीय मानक समय' (IST) को पूरे देश के लिए लागू किया गया

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  स्वतंत्र भारत में 1 सितंबर 1947 को आधिकारिक 'भारतीय मानक समय' (IST) को पूरे देश के लिए लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश को एक समय के सूत्र में बांधना और प्रशासन, परिवहन व संचार व्यवस्था में एकरूपता लाना था। भारतीय मानक समय, ग्रीनविच मीन टाइम (GMT/UTC) से 5 घंटे 30 मिनट आगे यानी UTC+05:30 है। भारत का यह समय 82.5 डिग्री पूर्वी देशांतर रेखा (82° 30' E) के आधार पर मापा जाता है, जो उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के पास मिर्जापुर और नैनी से होकर गुजरती है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ब्रिटिश काल के दौरान 1 जनवरी 1906 को ही IST को एक मानक के रूप में अपनाया गया था, लेकिन आजादी के बाद 1 सितंबर 1947 को इसे आधिकारिक रूप से पूरे देश के लिए एकमात्र राष्ट्रीय समय घोषित किया गया। इसके बावजूद कोलकाता ने 1948 तक और मुंबई ने 1955 तक अपना अलग स्थानीय समय बनाए रखा था, जिसके बाद वे भी पूरी तरह IST से जुड़ गए। वर्तमान में भारत के इस आधिकारिक समय का सटीक रखरखाव और संरक्षण नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) द्वारा किया जाता है। -- लोकेश कुशवाहा  #भारत #समय ...

1 सितंबर 1939 को पोलैंड पर जर्मन आक्रमण द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत करने वाली सबसे निर्णायक घटना

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  1 सितंबर 1939 को पोलैंड पर जर्मन आक्रमण द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत करने वाली सबसे निर्णायक घटना थी, जिसे सैन्य इतिहास में 'केस व्हाइट' के नाम से भी जाना जाता है। इस हमले के दौरान जर्मन सेना ने पहली बार अपनी कुख्यात 'ब्लिट्जक्रेग' यानी बिजली जैसी तेज गति से आक्रमण करने की रणनीति का इस्तेमाल किया, जिसने पोलिश रक्षा पंक्ति को झकझोर कर रख दिया। इस आक्रमण के पीछे जर्मनी और सोवियत संघ के बीच हुआ एक गुप्त समझौता था, जिसे मोलोटोव-रिबेंट्रोप पैक्ट कहा जाता है। इसी समझौते के तहत आगे चलकर 17 सितंबर 1939 को सोवियत संघ ने भी पूर्व की तरफ से पोलैंड पर हमला कर दिया और दोनों महाशक्तियों ने पूरे देश को आपस में बांट लिया। ब्रिटेन और फ्रांस ने पोलैंड की संप्रभुता की रक्षा के लिए एक सैन्य संधि की थी, जिसके कारण अपने वादे का पालन करते हुए उन्होंने 3 सितंबर को जर्मनी के खिलाफ युद्ध की आधिकारिक घोषणा कर दी और इस तरह पूरा यूरोप एक भीषण वैश्विक संघर्ष की आग में झुलस गया। #इतिहास #पोलैंड #polland #WorldWar2 #worldwar2history #WorldWar #History #Fact

1 सितंबर 1926 को राजस्थान के जोधपुर जिले के बोरुंदा गाँव में जनमे विजयदान देथा

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  1 सितंबर 1926 को राजस्थान के जोधपुर जिले के बोरुंदा गाँव में जनमे विजयदान देथा राजस्थानी भाषा के सबसे प्रसिद्ध और महान साहित्यकार माने जाते हैं। साहित्य जगत में उन्हें आदर से 'बिज्जी' और 'राजस्थान का शेक्सपियर' भी कहा जाता है। उन्होंने अपने पूरे जीवन में राजस्थानी लोककथाओं का गहन अध्ययन किया और उन्हें आधुनिक गद्य शैली में ढालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनका निधन 10 नवंबर 2013 को 87 वर्ष की आयु में हुआ था। उनकी साहित्यिक कृतियों में सबसे प्रमुख स्थान 'बातां री फुलवारी' का है, जो राजस्थानी लोक कथाओं का एक विशाल 14 खंडों का संग्रह है। इसके अलावा उन्होंने 'दुविधा', 'अलेखूँ हिटलर', 'चौधराईन की चतुराई', 'सपनप्रिया', 'महामिलन' और 'बापू के तीन हत्यारे' जैसी कई कालजयी रचनाएँ लिखीं। उन्होंने प्रसिद्ध संस्कृति कर्मी कोमल कोठारी के साथ मिलकर बोरुंदा में 'रूपायन संस्थान' की स्थापना भी की थी, जो आज भी राजस्थानी लोक कला, संगीत और परंपराओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। विजयदान देथा की कहानियों का भा...

30 अगस्त 1835 को मेलबर्न शहर की स्थापना

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  30 अगस्त 1835 को मेलबर्न शहर की स्थापना की गई थी। इसकी शुरुआत जॉन बैटमैन और जॉन पास्को फॉकनर के नेतृत्व में आए स्वतंत्र वासियों के एक समूह द्वारा हुई थी। स्थापना के शुरुआती दौर में इस जगह को 'बैटमेनिया' नाम से जाना जाता था, लेकिन साल 1837 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री लॉर्ड मेलबर्न के सम्मान में इसका नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर 'मेलबर्न' रख दिया गया। ऐतिहासिक रूप से 30 अगस्त 1835 का दिन इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दिन यारा नदी के किनारे पहला यूरोपीय घर बनाया गया था, जिसे आज के इस आधुनिक और भव्य शहर की वास्तविक शुरुआत माना जाता है। मेलबर्न शहर ऑस्ट्रेलिया (Australia) देश में आता है। यह ऑस्ट्रेलिया के 'विक्टोरिया' राज्य की राजधानी है और देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। #मेलबर्न #ऑस्ट्रेलिया #Australia #Melbourne #MelbourneHistory #Fact #History #factsinhindi

दो अलग-अलग घटनाएं कांग्रेस के दोहरे मापदंडों का जीवंत नमूना

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  सियासत के रंगमंच पर पाखंड और सुविधा की राजनीति का गजब दौर चल रहा है, जहां दो अलग-अलग घटनाएं कांग्रेस के दोहरे मापदंडों का जीवंत नमूना पेश करती हैं। पहला प्रहसन सोनिया गांधी की कथित आत्मकथा 'बिलांगिंग- अ जर्नी ऑफ लव' को लेकर सजाया जा रहा है। किस्सा यह है कि प्रकाशक संस्था पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया इसे भारत में छापने से पीछे हट गई, क्योंकि संपादक को कुछ अंशों पर आपत्ति थी और वे संदर्भ या प्रमाण मांग रहे थे। जब न तो स्रोत मिले और न ही सोनिया जी ने विवादित हिस्से हटाने की सहमति दी, तो प्रकाशक ने अपने कारोबारी नियम के तहत हाथ खींच लिए। किसी भी लेखक और संपादक के बीच तथ्य-पुष्टि की यह निहायत ही सामान्य पेशेवर प्रक्रिया होती है। हालांकि किसी भी पक्ष ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और यह भी मुमकिन है कि पूरा ड्रामा केवल किताब को मुफ्त की पब्लिसिटी दिलाने का सस्ता स्टंट हो। मगर राहुल गांधी के दरबारी बौद्धिकों ने तुरंत राग अलाप दिया कि पेंग्विन यह सब मोदी सरकार के खौफ की वजह से कर रहा है। पूरी तरह से कॉर्पोरेट और कारोबारी सौदे वाले इस मसले में भी जबरन सत्ता के डर का नैरेटिव ठूंस दिय...

भारतीय रिसर्च इकोसिस्टम में चीन की घुसपैठ

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  वैश्विक शैक्षणिक परिदृश्य और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में अपना दबदबा कायम करने के लिए चीन एक सोची-समझी साजिश के तहत भारतीय रिसर्च इकोसिस्टम में घुसपैठ कर रहा है। सीमा और व्यापार के बाद अब चीन ने भारतीय शोधकर्ताओं और युवा प्राध्यापकों को निशाना बनाना शुरू किया है। भास्कर की एक विशेष पड़ताल में सामने आया है कि चीन एक सुनियोजित साइटेशन कार्टेल संचालित कर रहा है। इस नेटवर्क के जरिए भारतीय शोधकर्ताओं को ई-मेल भेजकर सहयोग का झांसा दिया जाता है और फिर पैसों का प्रलोभन देकर उनसे अपने रिसर्च पेपर्स में चीनी शोधपत्रों के अप्रासंगिक संदर्भ यानी साइटेशन जुड़वाए जाते हैं। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम रूप से चीनी विश्वविद्यालयों और वहां के शोधकर्ताओं के साइटेशन इंडेक्स को बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करना है। इस गुप्त सिंडिकेट की कार्यप्रणाली को उजागर करने के लिए जब भास्कर रिपोर्टर ने खुद को एक रिसर्च कंसल्टेंट के रूप में प्रस्तुत किया और चीन की साइंस एक्सप्लोर नामक एजेंसी से संपर्क साधा, तो बातचीत के लिए बाबरा नाम का एक चीनी एजेंट नियुक्त किया गया। इस एजेंट ने वॉ...

ब्रिटेन के आम ग्राहकों के लिए "इंडियन करी" का षड्यंत्र

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  ब्रिटेन की हर गली-नुक्कड़ पर दिखने वाले तथाकथित "इंडियन करी हाउस" का सच ब्रिटिश खान-पान के इतिहास का सबसे बड़ा और दिलचस्प विरोधाभास है। बाहर बोर्ड पर गर्व से "इंडियन रेस्टोरेंट" लिखा होता है, लेकिन किचन से लेकर गल्ले तक की कमान असल में बांग्लादेशी और पाकिस्तानी मूल के प्रवासियों के हाथों में होती है। आंकड़ों की हकीकत यह है कि ब्रिटेन के करीब 80 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय रेस्टोरेंट का संचालन बांग्लादेशी, खासतौर पर सिलहट क्षेत्र से आए उद्यमी करते हैं, जबकि एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तानियों के नियंत्रण में है। यह कोई अनजाने में हुआ संयोग नहीं, बल्कि दशकों से चला आ रहा एक सोची-समझी व्यावसायिक रणनीति और ब्रांडिंग का खेल है। इस मुखौटे की सबसे बड़ी वजह "इंडिया" नाम की ऐतिहासिक और वैश्विक ब्रांड वैल्यू है। ब्रिटिश हुकूमत के दौर से ही अंग्रेजों के दिमाग में मसालों, समृद्ध संस्कृति और खान-पान की पहचान सीधे भारत से जुड़ी हुई थी। ब्रिटेन के आम ग्राहकों के लिए "इंडियन करी" एक जाना-पहचाना, भरोसेमंद और सकारात्मक स्वाद का प्रतीक बन चुका था। इसके विपरीत, 1947 के बंटव...

30 अगस्त 1659 को औरंगजेब के आदेश पर उसके सगे बड़े भाई दारा शिकोह की निर्ममता से हत्या

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 30 अगस्त 1659 को मुगल इतिहास की एक बेहद क्रूर और निर्णायक घटना घटी जब औरंगजेब के आदेश पर उसके सगे बड़े भाई दारा शिकोह की निर्ममता से हत्या कर दी गई। शाहजहां के बीमार पड़ते ही चारों भाइयों के बीच गद्दी के लिए भीषण गृहयुद्ध छिड़ गया था। दारा शिकोह शाहजहां के सबसे बड़े और पसंदीदा बेटे थे जिन्हें आधिकारिक तौर पर उत्तराधिकारी घोषित किया गया था। वह स्वभाव से बेहद उदार, दार्शनिक और सूफी विचारधारा के समर्थक थे। उन्होंने हिंदू और इस्लाम धर्म की समानताओं को उजागर करने के लिए उपनिषदों और भगवद गीता का फारसी भाषा में अनुवाद करवाया था, जिसे सिर्र-ए-अकबर यानी महान रहस्य नाम दिया गया। औरंगजेब एक कट्टर रूढ़िवादी और महत्वाकांक्षी शासक था, जो दारा शिकोह की इस उदारवादी धार्मिक नीति को इस्लाम के खिलाफ मानता था। औरंगजेब ने दारा शिकोह की हत्या केवल सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि राजनैतिक और धार्मिक वर्चस्व को पूरी तरह स्थापित करने के लिए करवाई थी। औरंगजेब ने सामूगढ़ और देवराई के युद्धों में दारा शिकोह की सेना को बुरी तरह हरा दिया था। इसके बाद दारा शिकोह को बंदी बनाकर दिल्ली लाया गया, जहां औरंगजेब न...

30 अगस्त 1574 को गुरु रामदास जी सिखों के चौथे गुरु बने थे

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  30 अगस्त 1574 को गुरु रामदास जी सिखों के चौथे गुरु बने थे, जिन्हें यह गुरुगद्दी अपने ससुर और तीसरे गुरु, गुरु अमरदास जी से प्राप्त हुई थी। सिख इतिहास में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि उन्होंने ही पवित्र शहर अमृतसर की स्थापना की थी, जिसे शुरुआती समय में 'रामदासपुर' के नाम से जाना जाता था। इसके साथ ही उन्होंने अमृतसर में पवित्र संतोखसर सरोवर की खुदाई का कार्य भी शुरू करवाया था। धार्मिक और सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में उन्होंने सिख विवाह समारोह यानी आनंद कारज के दौरान पढ़ी जाने वाली चार 'लवाण' (फेरों के सूक्त) की रचना की थी, जिसका पालन आज भी सिख परंपराओं में पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है। #गुरुरामदास_जी #अमृतसर #रामदासपुर #इतिहास #GuruRamdasJi #Amritsar #Ramdaspur #History #Fact #HindiFact #factsinhindi #factsdaily #historyfacts #historyofindia

महान स्वतंत्रता सेनानी कनाईलाल दत्त

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  भारत माँ के वीर सपूत और महान स्वतंत्रता सेनानी कनाईलाल दत्त का जन्म 30 अगस्त 1888 को बंगाल के हुगली जिले के चंदननगर में हुआ था। वह देश की आजादी के लिए मात्र 20 वर्ष की आयु में हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए थे। अपने छात्र जीवन के दौरान ही वह बंगाल के प्रसिद्ध क्रांतिकारी संगठन 'अनुशीलन समिति' और 'युगांतर' समूह के सक्रिय सदस्य बन गए थे, जहाँ उन्होंने 1905 में हुए बंगाल विभाजन का कड़ा विरोध किया था। साल 1908 में मुजफ्फरपुर के दमनकारी अंग्रेज मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड पर हुए हमले के बाद ब्रिटिश सरकार ने कड़ी कार्रवाई की। इस अलीपुर बम कांड के सिलसिले में कनाईलाल दत्त, अरविन्द घोष और बारीन्द्र कुमार घोष सहित कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर अलीपुर जेल में डाल दिया गया। इसी दौरान जेल में बंद क्रांतिकारियों में से एक, नरेन्द्र नाथ गोस्वामी (नरेन), अंग्रेजों का सरकारी मुखबिर बन गया और उसने दल के कई गुप्त राज अंग्रेजों के सामने उगल दिए। क्रांतिकारी आंदोलन और अपने साथियों को सुरक्षित रखने के लिए कनाईलाल दत्त और सत्येन्द्रनाथ बोस ने जेल के भीतर ही एक साहसिक योजना बनाई। उन्होंन...

Gen Z लड़की से क्यों डर गया राहुल गांधी ?

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 राहुल गांधी और उनकी करोड़ों रुपयों वाली पीआर मशीनरी को महज़ 20 साल की एक जेन-ज़ी लड़की ने पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है। इसी घबराहट का नतीजा है कि कांग्रेस ने इस युवा फैक्ट चेकर के खिलाफ बाकायदा एफआईआर दर्ज करवा दी। असल विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने प्रयागराज, कोटा, देहरादून और पुणे इन चार शहरों में अपने कार्यक्रमों के दौरान ताबड़तोड़ 40 ऐसे दावे कर दिए, जो पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक साबित हुए। एक 20 साल की Gen Z लड़की से क्यों डर गया राहुल गांधी ?  Gen Z फैक्ट चेकर पर कांग्रेस ने करवाई FIR, इसने राहुल गांधी की करोड़ो रूपयों वाली पूरी PR मशीनरी का गेम बिगाड़ दिया है। कांग्रेस के इन भ्रामक दावों की हकीकत जनता के सामने लाने के लिए उस 20 साल की लड़की ने 'झूठ की गूँज' नाम से एक वेबसाइट तैयार की। इस एक वेबसाइट ने राहुल गांधी के हर झूठे दावे का तथ्यात्मक विश्लेषण करके उनकी भारी-भरकम पीआर टीम और कांग्रेस आईटी सेल की कथित झूठ की फैक्ट्री का पूरा गेम बिगाड़ दिया। सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के दम पर जब पूरे राजनीतिक तंत्र के दावों की पोल खुली, तो कांग्रेस के पास जवाब देने क...

बाबा हरभजन सिंह की आत्मा देश की सीमाओं की रक्षा कर रही है।

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  भारतीय सेना के वीर सैनिक बाबा हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 को पंजाब के गुजरावाला जिले के सदराना गांव में हुआ था, जो वर्तमान समय में पाकिस्तान का हिस्सा है। वे महज 19 वर्ष की आयु में 12 फरवरी 1966 को भारतीय सेना की पंजाब रेजिमेंट में बतौर सिपाही शामिल हुए थे। पूर्वी सिक्किम के नाथू ला पास के पास सेना में अपनी सेवा देते हुए 4 अक्टूबर 1968 को एक दर्दनाक हादसे में उनकी शहादत हुई। खच्चरों का काफिला ले जाने के दौरान पैर फिसलने की वजह से वे एक गहरे नाले में गिर गए थे। उनकी मृत्यु के बाद से जुड़ी एक अद्भुत मान्यता है कि वे अपने एक साथी सैनिक के सपने में आए और उन्होंने अपने पार्थिव शरीर की सटीक लोकेशन बताई, जिसके बाद सेना ने उनके शव को उसी स्थान से बरामद किया। सैनिकों और स्थानीय लोगों के बीच यह दृढ़ विश्वास है कि शहीद होने के बाद भी बाबा हरभजन सिंह की आत्मा देश की सीमाओं की रक्षा कर रही है। ऐसा माना जाता है कि वे चीनी सेना की किसी भी संदिग्ध गतिविधि के बारे में भारतीय सैनिकों को सपने में आकर पहले ही सचेत कर देते हैं। उनके प्रति सम्मान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत और ची...

भविष्य पुराण को अशुद्ध और विकृत करने का ब्रिटिश षड्यंत्र

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  भविष्य पुराण को अशुद्ध और विकृत करने का ब्रिटिश षड्यंत्र 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल और ईसाई मिशनरियों के गठजोड़ द्वारा रचा गया था। इस पूरी जालसाजी की शुरुआत सन 1800 के बाद तब हुई, जब अंग्रेजों ने महसूस किया कि तलवार के बल पर भारतीयों का धर्मांतरण करना असंभव है, इसलिए उन्होंने भारत के प्राचीन धार्मिक वांग्मय को ही भीतर से खोखला करने की नीति अपनाई। भविष्य पुराण अपनी प्रकृति के कारण इस षड्यंत्र के लिए सबसे आसान लक्ष्य बना, क्योंकि इसमें इतिहास को भविष्य की वंशावलियों के रूप में लिखने की एक पारंपरिक शैली पहले से मौजूद थी। इस औपनिवेशिक साजिश को अंजाम देने के लिए अंग्रेजों ने संस्कृत के कुछ स्थानीय लालची, हिन्दू विरोधी और वामपंथ से प्रेरित लोगों को आर्थिक संरक्षण दिया और उनसे भारी मात्रा में नए श्लोक लिखवाए। इन जाली श्लोकों को भविष्य पुराण के 'प्रतिसर्ग पर्व' में शामिल किया गया, जिसका प्राचीन हस्तलिखित प्रतियों में कोई वजूद नहीं था। इस मिलावट का मुख्य रणनीतिक उद्देश्य यह था कि जब कोई साधारण हिंदू अपने ग्रंथों को पढ़े, तो उसे लगे कि ईसा मसीह (ईशपुत्र) य...

चाय को लेकर राहुल गांधी का हालिया बयान उनकी जमीनी हकीकत

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  राहुल गांधी का हालिया बयान उनकी जमीनी हकीकत से कटी हुई सोच और समाज में विभाजन पैदा करने की सियासत का एक और प्रत्यक्ष प्रमाण बनकर सामने आया है। उन्होंने देश भर की चाय की दुकानों को लेकर एक ऐसा अजीबोगरीब और बेतुका दावा पेश किया, जिसे सुनकर कोई भी आम नागरिक हैरान रह जाएगा। राहुल गांधी के अनुसार देश की चाय की थड़ियों पर दो तरह के ग्लास होते हैं एक कांच का रीयूजेबल ग्लास और दूसरा इस्तेमाल करके फेंक देने वाला डिस्पोजेबल ग्लास। उनके इस बेतुके तर्क के मुताबिक, सवर्ण समाज के लोग कांच के गिलासों में चाय पीते हैं, जबकि दलितों और अन्य जातियों के लोगों को डिस्पोजेबल गिलासों में चाय दी जाती है। यह बयान उनकी घोर अज्ञानता और जमीनी वास्तविकताओं से पूरी तरह अनभिज्ञ होने का जीता-जागता सबूत है। ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने कभी आम जनता के बीच बैठकर किसी सामान्य चाय की दुकान पर चाय पीने का अनुभव ही नहीं किया है, फिर भी हर सामान्य और रोजमर्रा की चीज में जबरन जातिवाद घुसाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। असल में हिंदू समाज को बांटने और वर्ग-विभाजन का झूठा नैरेटिव खड़ा करने का एक तय एजेंडा चलाया जा रहा है,...

डायरेक्ट एक्शन डे 16 अगस्त 1947 Direct Action Day

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 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा घोषित डायरेक्ट एक्शन डे भारतीय इतिहास का एक अत्यंत काला अध्याय है, जिसका सबसे दर्दनाक और भयावह खामियाजा कोलकाता के बहुसंख्यक हिंदू समाज को भुगतना पड़ा। डायरेक्ट एक्शन डे के दौरान हिंदुओं को जिस अमानवीय और दर्दनाक स्थिति का सामना करना पड़ा, उसकी पूरी विस्तृत और क्रूर सच्चाई इस प्रकार है। 16 अगस्त 1946 की सुबह कोलकाता के हिंदुओं के लिए एक ऐसा खौफनाक मंजर लेकर आई जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं ने सुबह से ही जबरन दुकानें बंद करवाना शुरू कर दिया और विरोध करने वाले हिंदू दुकानदारों पर लाठियों, छुरों और पेट्रोल बमों से हमले शुरू कर दिए। उस समय बंगाल के मुख्यमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने न केवल पुलिस को थानों में बंद रहने का गुप्त आदेश दिया, बल्कि लालबाजार पुलिस मुख्यालय के कंट्रोल रूम में खुद बैठकर स्थिति को नियंत्रित करने के बजाय दंगाइयों को संरक्षण दिया। दोपहर में जब शहीद मीनार मैदान पर लाखों की हिंसक भीड़ जमा हुई, तो सुहरावर्दी ने मंच से खुलेआम कहा कि पुलिस और सेना उनके काम में दखल नहीं देगी। इस उकसावे के बाद हथियारों...

लोकतांत्रिक पदों पर लगातार 25 वर्ष रहने और इस दौरान हर साल 15 अगस्त को ध्वजारोहण करने करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी

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 लोकतांत्रिक पदों पर लगातार 25 वर्ष रहने और इस दौरान हर साल 15 अगस्त को ध्वजारोहण करने का एक ऐसा अनोखा रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनाया है जो देश का कोई और प्रधानमंत्री नहीं बना सका। आज 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार तिरंगा फहराकर उन्होंने इतिहास रचा है। इस गौरवशाली पल के पीछे उनका एक अनूठा लोकतांत्रिक सफर छिपा है क्योंकि वे देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो लगातार 25 वर्षों से शीर्ष लोकतांत्रिक पदों पर बने हुए हैं। इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत अक्टूबर 2001 में हुई जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला। मई 2014 तक इस पद पर रहते हुए उन्होंने लगातार 12 बार राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोहों में तिरंगा फहराया। इसके बाद मई 2014 में देश के प्रधानमंत्री बनने से लेकर आज तक उन्होंने लगातार 13वीं बार देश के मुख्य मंच से ध्वजारोहण कर राष्ट्र को संबोधित किया है।यह रिकॉर्ड इसलिए सबसे अलग है क्योंकि भारत के इतिहास में जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी या मनमोहन सिंह जैसे नेता कभी मुख्यमंत्री नहीं रहे और सीधे प्रधानमंत्री बने। जबकि प्रथम बार जवाहर लाल ने...